Bokaro: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने अपने संयंत्रों और इकाइयों की जमीनों के लीज और सब-लीज (पट्टा) नवीनीकरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और पारदर्शी नीति लागू कर दी है। सेल बोर्ड की 532वीं बैठक में “सरकारी और बाहरी एजेंसियों को आवंटित भूमि के लीज/सब-लीज नवीनीकरण नीति-2026” को मंजूरी दे दी गई है। यह नीति 15 मई 2026 से प्रभावी मान ली गई है। सेल के महाप्रबंधक (मानव संसाधन) मुकेश कुमार द्वारा सभी प्लांट व इकाइयों के एचआर प्रमुखों को इस बाबत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस नई नीति के लागू होने से व्यावसायिक संस्थानों, सरकारी विभागों सहित सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के लिए लीज नवीनीकरण के नियम व शुल्क तय हो गए हैं। नई गाइडलाइन केवल पुराने लीज मामलों के नवीनीकरण पर लागू होगी, किसी नए भूमि आवंटन पर नहीं।

तीन श्रेणियों में बांटी गई जमीनें
पारदर्शिता के लिए सेल ने आवंटित जमीनों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है:
- कैटेगरी-1 (कमर्शियल/सामान्य): इसमें सीपीएसई, राज्य पीएसयू, बैंक, एटीएम, बीमा कंपनियां, निजी दुकानें, पेट्रोल पंप और सिनेमा हॉल शामिल हैं।
- कैटेगरी-2 (सरकारी व गैर-व्यावसायिक): इसमें आयकर विभाग, सीआईएसएफ, डाकघर, जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, प्रोफेशनल बॉडीज (ICAI, NIPM आदि), ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां और स्कूल-कॉलेज शामिल हैं।
- कैटेगरी-3 (सामाजिक व धार्मिक संस्थान): इसमें मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, श्मशान घाट/कब्रिस्तान, रामकृष्ण मिशन, ब्रह्मकुमारी, पब्लिक लाइब्रेरी, चैरिटेबल स्कूल और अस्पताल शामिल हैं।
कैटेगरी के हिसाब से लगेगा रिन्यूअल चार्ज
सेल के अधिकृत वैल्यूअर द्वारा जमीन का वर्तमान मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद देय तिथि पर तय जमीन की कीमत (लैंड प्रीमियम) के आधार पर नवीनीकरण शुल्क लिया जाएगा:

कैटेगरी-1: वर्तमान लैंड प्रीमियम का 25 प्रतिशत।
कैटेगरी-2: वर्तमान लैंड प्रीमियम का 10 प्रतिशत।
कैटेगरी-3: इसके तहत आने वाले सामाजिक-धार्मिक संगठनों से केवल 1 रुपये की टोकन राशि ली जाएगी (हालांकि इन्हें ग्राउंड रेंट और सर्विस चार्ज कैटेगरी-2 के समान देना होगा)।
निरीक्षण के लिए बनेगी ‘स्टैंडिंग कमेटी’: तीन सीजीएम (E-8 स्तर) की एक स्थायी समिति जमीन के उपयोग की जांच करेगी। यदि किसी सामाजिक या शैक्षणिक संस्थान (कैटेगरी 2B, 2D और 3) की पिछले 5 वर्षों की औसत वार्षिक आय 50 लाख रुपये या अधिक है, और आय-व्यय से 15% ज्यादा है, तो उन्हें अगली उच्च श्रेणी के तहत चार्ज देना होगा।
लीज की अवधि और अन्य शुल्क
जमीन की लीज अवधि 30 से 33 वर्ष के लिए सीमित होगी, जिसे शर्तों के अधीन एक और कार्यकाल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा निम्नलिखित शुल्क लागू होंगे:
सिक्योरिटी डिपॉजिट: वार्षिक ग्राउंड रेंट और सर्विस चार्ज के कुल योग का तीन गुना (ब्याज मुक्त)।
ग्राउंड रेंट (वार्षिक): नवीनीकरण शुल्क का 1 प्रतिशत, जिसमें हर 5 साल बाद 10% की बढ़ोतरी होगी।
सर्विस चार्ज (वार्षिक): नवीनीकरण शुल्क का 2 प्रतिशत, जिसमें हर 5 साल बाद 10% की बढ़ोतरी होगी।
बिजली-पानी शुल्क: निजी पार्टियों के लिए लागू दरों के अनुसार देय होगा।
देरी करने वालों पर लगेगा जुर्माना, एमनेस्टी स्कीम भी
लीज खत्म होने के 1 वर्ष के भीतर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नवीनीकरण कराना होगा। पुराने मामलों के लिए सेल ने **एकमुश्त माफी योजना (Amnesty Scheme) दी है:
- 1 वर्ष के भीतर रिन्यूअल कराने पर: बकाया नवीनीकरण शुल्क पर एसबीआई के कैश क्रेडिट रेट के आधार पर साधारण ब्याज लगेगा, लेकिन कोई दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) नहीं लिया जाएगा।
- 1 वर्ष के बाद देरी करने पर: डिफाल्टरों को बकाया नवीनीकरण शुल्क पर 12% वार्षिक साधारण ब्याज की दर से जुर्माना देना होगा।
अवैध कब्जा हटाने और बेदखली की सख्त कार्रवाई
यदि कोई आवंटी निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं करता है और बकाया जमा नहीं करता है, तो प्रबंधन द्वारा दो नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद भी लापरवाही बरतने पर आवंटी को “अवैध कब्जाधारी” (Unauthorised Occupant) घोषित कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में सेल प्रबंधन बिना किसी अग्रिम नोटिस के लीज रद्द करने, बेदखली (Eviction) की कार्रवाई करने और हर्जाना वसूलने के लिए कानूनी कदम उठाएगा। इस पूरी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और व्याख्या का अंतिम अधिकार सेल के अध्यक्ष (CMD) और निदेशक (कार्मिक) के पास सुरक्षित रहेगा। आवर्तक मामलों में संबंधित फंक्शनल डायरेक्टर अंतिम निर्णय लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे।

