Report | CurrentBokaro Desk

Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) संचालित बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) के ब्लड सेंटर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 24 वर्षीय युवक में अत्यंत दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Oh या HH) की सफल पहचान की है। नियमित डायग्नोस्टिक स्क्रीनिंग और ब्लड कम्पैटिबिलिटी टेस्टिंग के दौरान इस दुर्लभ रक्त समूह का पता चला। विशेष प्रयोगशाला जांच के बाद इसकी पुष्टि की गई, जो बीजीएच की ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन सेवाओं के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।

विशेष जांच के बाद हुई पुष्टि
अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, रक्त समूह की पुष्टि क्रॉस-मैचिंग, एंटीजन टेस्टिंग और अन्य विशेष प्रयोगशाला जांच के माध्यम से की गई। चिकित्सकों का कहना है कि बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group) दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में से एक है। वैश्विक स्तर पर यह लगभग 40 लाख लोगों में से केवल एक व्यक्ति में पाया जाता है, जबकि भारत में इसकी अनुमानित उपलब्धता लगभग 10 हजार लोगों में एक है। इस रक्त समूह की पहली पहचान वर्ष 1952 में मुंबई में डॉ. वाई. एम. भेंडे ने की थी, जिसके कारण इसका नाम ‘बॉम्बे ब्लड ग्रुप’ पड़ा।
सामान्य O ग्रुप से भी अलग है यह रक्त समूह
बीएसएल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मणिकांत धान ने बताया कि बीजीएच के चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश लोग A, B, AB और O ब्लड ग्रुप तथा उनके पॉजिटिव-नेगेटिव प्रकारों से परिचित हैं, लेकिन बॉम्बे ब्लड ग्रुप पूरी तरह अलग होता है। इसमें H एंटीजन नहीं होता, जबकि O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में भी यह एंटीजन मौजूद रहता है। इसी कारण इस रक्त समूह वाले मरीज केवल बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group) वाले व्यक्ति का ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं। यदि ऐसे मरीज को O पॉजिटिव या O नेगेटिव रक्त चढ़ाया जाए तो गंभीर और जानलेवा हीमोलाइटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन होने का खतरा रहता है।
अस्पताल ने सुरक्षित किया डोनर का रिकॉर्ड

बीजीएच प्रमुख डॉ. बी. बी. करुणामय तथा प्रयोगशाला सेवाओं एवं ब्लड सेंटर के प्रभारी डॉ. अनिंदा मंडल के मार्गदर्शन में उप मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में टीम ने इस दुर्लभ रक्तदाता का पूरा विवरण अस्पताल के डेटाबेस में सुरक्षित दर्ज कर लिया है। इससे भविष्य में यदि किसी मरीज को बॉम्बे ब्लड ग्रुप की आवश्यकता होगी तो आपातकालीन स्थिति में संबंधित रक्तदाता से तुरंत संपर्क किया जा सकेगा।
परिवार के सदस्यों की भी होगी जांच
इस दुर्लभ रक्त समूह की पहचान के बाद अस्पताल ने रक्तदाता के परिवार के सदस्यों की भी जांच शुरू कर दी है। चिकित्सकों के अनुसार बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group) आनुवंशिक (जेनेटिक) रूप से विरासत में मिलने वाला रक्त समूह है, इसलिए परिवार के अन्य सदस्यों में भी इसके मिलने की संभावना रहती है।
बीजीएच की आधुनिक जांच क्षमता का प्रमाण
मणिकांत धान ने कहा कि इस उपलब्धि ने बीजीएच की उन्नत डायग्नोस्टिक क्षमता, चिकित्सकीय विशेषज्ञता और मरीजों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया है। यह उपलब्धि भविष्य में आपातकालीन रक्ताधान सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगी।
दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में शामिल
बीजीएच के एक चिकित्सक Dr Aninda Mandal ने बताया कि दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में Rh-null (जिसे “गोल्डन ब्लड” भी कहा जाता है), बॉम्बे (Oh) फेनोटाइप और AB-नेगेटिव शामिल हैं। किसी रक्त समूह की दुर्लभता लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद या अनुपस्थित विशेष एंटीजन (प्रोटीन एवं शर्करा) के आधार पर निर्धारित की जाती है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Bombay Blood Group, also known as Oh or HH phenotype, is one of the rarest blood groups in the world. People with this blood type do not have the H antigen, which is present in almost all other blood groups, including O group.
The Bombay Blood Group is found in approximately one in four million people globally. In India, its occurrence is estimated at around one in 10,000 people, making it one of the rarest blood types.
The rare blood group was identified at the Blood Centre of Bokaro General Hospital (BGH), operated by Bokaro Steel Plant.
The rare blood type was detected in a 24-year-old male during routine diagnostic screening and blood compatibility testing at BGH.
No. A person with Bombay Blood Group can generally receive blood only from another Bombay Blood Group donor. Transfusion of regular O positive or O negative blood may cause a severe haemolytic transfusion reaction.
The identification of a Bombay Blood Group donor will strengthen emergency transfusion preparedness in Bokaro and help doctors quickly arrange compatible blood during critical medical situations.
The Bombay Blood Group was first identified in 1952 in Mumbai by Dr Y. M. Bhende and his team, after which it received its name.
The rarest blood groups include Rh-null (“Golden Blood”), Bombay Blood Group (Oh phenotype), and AB-negative blood group.
Yes. Bombay Blood Group is a genetically inherited blood type. Hospitals often recommend screening family members after identifying a case.
BGH has recorded the donor details in its database, allowing doctors to contact the donor quickly if a patient with the same rare blood group requires emergency transfusion.

