Bokaro: चिन्मय विद्यालय बोकारो ने अपनी स्थापना के 50वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर भव्य स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया। वर्ष 1977 में स्थापित यह विद्यालय अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी जाना जाता है। समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री भारत सरकार अन्नपूर्णा देवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

समारोह में गणमान्य अतिथियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में बोकारो जिला के पूर्व विधायक बिरंची नारायण, चिन्मय मिशन बोकारो की आवासीय आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती, अध्यक्ष बिस्वरूप मुखोपाध्याय, सचिव महेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष आरएन मलिक, प्राचार्य सूरज शर्मा, वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार और उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा सहित जिले के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य, निदेशक एवं अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
स्वर्ण जयंती समारोह की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद प्री-प्राइमरी के विद्यार्थियों ने भगवद्गीता के 12वें अध्याय का पाठ प्रस्तुत किया। संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया।

शिव स्तुति और संथाली नृत्य ने मोहा मन
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने शिव स्तुति पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद झारखंड की समृद्ध लोक एवं जनजातीय संस्कृति को दर्शाते हुए विद्यार्थियों ने संथाली नृत्य प्रस्तुत किया। शानदार प्रस्तुति से पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
350 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की कृष्ण लीला
समारोह का प्रमुख आकर्षण कृष्ण लीला का मंचन रहा। 350 से अधिक विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर प्रेम अध्याय तक की कथा को नाट्य रूपांतरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की अभिनय क्षमता और शानदार प्रस्तुति को अभिभावकों और अतिथियों ने खूब सराहा।
41 से अधिक विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
मुख्य अतिथि अन्नपूर्णा देवी ने शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 41 से अधिक विद्यार्थियों को सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में विद्यालय की भूमिका सराही
मुख्य अतिथि अन्नपूर्णा देवी ने अभिभावकों, विद्यार्थियों और अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिन्मय विद्यालय बोकारो भारतीय संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही विशेषता विद्यालय को अन्य शिक्षण संस्थानों से अलग पहचान देती है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के योगदान को किया याद
अन्नपूर्णा देवी ने स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती को याद करते हुए कहा कि भारतीय विरासत और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के सकारात्मक उद्देश्य से गुरुदेव ने चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि आज उस उद्देश्य के सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को साकार करने में जेन-जी की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया।
पूर्व प्राचार्यों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में चिन्मय विद्यालय बोकारो के पूर्व प्राचार्य भी मौजूद रहे। इनमें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. हेमलथा विश्वास, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अशोक सिंह और अशोक कुमार झा शामिल रहे। स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती ने सभी पूर्व प्राचार्यों को सम्मानित करते हुए विद्यालय के विकास में उनके योगदान को याद किया और उनके प्रति आभार जताया।
पूर्व शिक्षक और एलुमनी एसोसिएशन के सदस्य भी सम्मानित
समारोह के दौरान विद्यालय के पूर्व शिक्षकों और एलुमनी एसोसिएशन के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। विद्यालय परिवार ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और संस्थान की विकास यात्रा में उनकी भूमिका को सम्मान के साथ याद किया।
स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती ने गुरुदेव को किया स्मरण
स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती ने स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती को स्मरण करते हुए कहा कि आज चिन्मय विद्यालय जिस ऊंचाई तक पहुंचा है, उसकी नींव गुरुदेव ने रखी थी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव आज भले ही प्रत्यक्ष रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और मार्गदर्शन निरंतर विद्यालय परिवार के साथ हैं।
शिक्षकों और विद्यार्थियों के योगदान को बताया महत्वपूर्ण
उन्होंने विद्यालय के सभी पूर्व एवं वर्तमान शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के निरंतर प्रयास, समर्पण और सहयोग का परिणाम है कि चिन्मय विद्यालय बोकारो आज अपना स्वर्ण महोत्सव मना रहा है।
प्राचार्य सूरज शर्मा ने विद्यार्थियों को दिया सीखने का संदेश
प्राचार्य सूरज शर्मा ने मुख्य अतिथि अन्नपूर्णा देवी का समारोह में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन की किसी भी परिस्थिति में सीखने और सिखाने की प्रक्रिया को नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्राचार्यों और शिक्षकों के योगदान को विद्यालय की वर्तमान सफलता की आधारशिला बताया।
विद्यार्थियों को विरासत आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी
प्राचार्य सूरज शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए चिन्मय विद्यालय की विरासत को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यालय से मिली शिक्षा, संस्कार और मूल्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान विद्यार्थियों की भी है।
आयोजन समिति ने कार्यक्रम को सफल बनाने में निभाई भूमिका
कार्यक्रम के अंत में वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समारोह के सफल आयोजन में आयोजन समिति की सुब्रता गुप्ता, मीनाक्षी कुमारी, सोनाली गुप्ता, सीबेन चक्रवर्ती सहित अन्य शिक्षक एवं स्टाफ सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


