Bokaro: बर्फीली हवाओं की मार, कड़ाके की ठंड और हर कदम पर मंडराता हिमस्खलन का खतरा भी बोकारो के बेटे लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार के हौसले को नहीं डिगा सका। 6,512 मीटर ऊंची माउंट भागीरथी की दुर्गम चोटी पर तिरंगा फहराकर उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि ऊंचाई पहाड़ की नहीं, हौसले की होती है।

10 घंटे की चढ़ाई, फिर शिखर पर तिरंगा
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में चलाए गए भारतीय सेना के पर्वतारोहण अभियान में लेफ्टिनेंट कर्नल जयप्रकाश कुमार के नेतृत्व में 28 सदस्यीय दल ने 22 सितंबर को माउंट भागीरथी की चोटी पर सफलता हासिल की। करीब 10 घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद जब दल शिखर पर पहुंचा और तिरंगा लहराया, तो यह केवल एक पर्वत विजय नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और संकल्प की कहानी बन गई।
रास्ता कठिन था, लेकिन इरादे उससे मजबूत
खड़ी और संकरी बर्फीली चढ़ाई के दौरान दल को तेज हवाओं, शून्य से नीचे तापमान और गिरते पत्थरों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अभियान की शुरुआत 7,075 मीटर ऊंची माउंट सतोपंथ को लक्ष्य बनाकर हुई थी, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बीच दल ने 6,512 मीटर ऊंची माउंट भागीरथी पर अपनी सफलता दर्ज की।

बोकारो से एवरेस्ट तक का सफर
फुसरो निवासी जयप्रकाश कुमार ने प्रारंभिक शिक्षा बोकारो में हासिल की और सैनिक स्कूल तिलैया से 10+2 की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2003 में मगध विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद 2005 में भारतीय सेना में शामिल हुए। वर्ष 2009 से उन्होंने पर्वतारोहण को अपने सैन्य जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया और अब तक 55 से अधिक चोटियों पर अभियान कर चुके हैं।
एवरेस्ट पर भी लिख चुके हैं सफलता की कहानी
वर्ष 2019 में उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया। अभियान से वापसी के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए और फ्रॉस्टबाइट का भी सामना करना पड़ा, लेकिन बर्फीले ग्लेशियरों और बेहद कम तापमान के बीच उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। वर्ष 2024 में उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को भी फतह किया।
सम्मान से बढ़कर युवाओं को संदेश
उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें सेना मेडल के साथ वर्ष 2020 में ‘तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन जयप्रकाश के लिए हर शिखर एक नई शुरुआत है। उनका अगला सपना दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट कंचनजंगा पर पहुंचना और भविष्य में झारखंड के युवाओं के लिए पर्वतारोहण प्रशिक्षण स्कूल खोलना है।
पहाड़ों से बड़ा सपना
जयप्रकाश कुमार की यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो मुश्किलों के सामने अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं। उनका सफर बताता है कि रास्ता चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, मेहनत, धैर्य और मजबूत संकल्प के साथ मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। बोकारो की धरती से निकला यह पर्वतारोही आज देश के तिरंगे को दुनिया की ऊंचाइयों तक पहुंचाने की कहानी लिख रहा है।
