Bokaro: विस्थापितों के आंदोलन के दौरान बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के सभी 11 गेटों की घेराबंदी और कर्मचारियों की आवाजाही बाधित होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने रविवार, 18 अक्टूबर को विशेष सुनवाई की। अदालत में बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और एसपी नाथू सिंह मीणा वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए। डीसी ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्लांट में कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रवेश तथा निकास में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।


बीएसएल की याचिका पर पूजा अवकाश में हुई सुनवाई
बोकारो स्टील लिमिटेड की ओर से हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर प्लांट के सभी गेटों पर पूर्ण नाकेबंदी की जानकारी दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि बोकारो विधायक श्वेता सिंह और विस्थापित अप्रेंटिस संघ (VAS) के आंदोलनकारियों के कारण कर्मचारियों, रखरखाव कर्मियों, कच्चे माल और आवश्यक सामग्रियों की आवाजाही बाधित हुई है। इससे प्लांट का निर्बाध संचालन प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था।
बीएसएल की ओर से अदालत को बताया गया कि प्लांट की स्थापना के बाद से कभी इसे बंद नहीं किया गया है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम सात दिन की तैयारी के बिना जबरन उत्पादन बंद होने की स्थिति में ब्लास्ट फर्नेस में लगभग 12,000 टन पिघला हुआ स्टील जम सकता है। इससे हजारों करोड़ रुपये के उपकरणों को नुकसान पहुंचने के साथ पर्यावरण और मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि प्लांट के कई हिस्से 13 अक्टूबर 1969 की बिहार गजट अधिसूचना और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धारा 2 के तहत प्रतिबंधित या संरक्षित क्षेत्र में आते हैं।

15 अक्टूबर के आवेदन पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
बीएसएल की ओर से अदालत को बताया गया कि 15 अक्टूबर 2026 को चास स्थित जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने बीएसएल की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा के पत्र को तत्काल अदालत के संज्ञान में लाया। पूजा अवकाश के दौरान मामले की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।
डीसी ने कहा, सभी 11 गेट खोल दिए गए
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता (AAG-IA) जय प्रकाश वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि बोकारो के जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से संपर्क कर डीसी तथा एसपी की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। डीसी अजय नाथ झा ने अदालत को बताया कि प्लांट के आसपास और सभी 11 गेटों पर जुटे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए प्रभावी प्रयास किए गए। आंदोलनकारियों को समझाकर प्लांट का संचालन बाधित नहीं करने के लिए राजी किया गया।
डीसी ने बताया कि गेट संख्या-1 खोल दिया गया है और प्लांट के अंदर फंसे कर्मचारियों को अपने घर जाने की अनुमति दे दी गई है। इस पर बीएसएल के अधिवक्ता ने अन्य 10 गेटों को भी खोलने की आवश्यकता बताई। डीसी ने अदालत को जानकारी दी कि बाकी 10 गेट भी खोल दिए गए हैं। इसके बाद बीएसएल के अधिवक्ता ने निर्देश प्राप्त कर पुष्टि की कि सभी गेटों से कर्मचारियों और अधिकारियों का आना-जाना फिर से शुरू हो गया है।
दोबारा गेट बंद होने की आशंका पर अदालत ने जताई चिंता
बीएसएल की ओर से अदालत में आशंका जताई गई कि जिला प्रशासन और पुलिस ने स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखा तो प्रदर्शनकारी दोबारा गेट बंद कर सकते हैं। अधिवक्ता ने कहा कि 15 अक्टूबर को आवेदन दिए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों ने एक दिन के लिए जबरन गेट बंद कर दिए थे। इस पर डीसी अजय नाथ झा ने अदालत को बार-बार आश्वस्त किया कि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी शुरू होने तथा समाप्त होने के समय उनके निर्बाध आवागमन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। कर्मचारियों के मन से भय दूर करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से प्लांट आने-जाने देने के लिए भी उचित व्यवस्था की जाएगी।
गृह सचिव को बुलाने की जरूरत नहीं, डीसी ने दिया भरोसा
अदालत ने डीसी से पूछा कि क्या आंदोलनकारियों के कारण स्थिति नियंत्रित करने में उन्हें किसी तरह की कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर गृह सचिव को भी बुलाया जा सकता है। हालांकि, डीसी ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए किसी उच्च अधिकारी को बुलाने की जरूरत नहीं है और वह स्वयं हालात संभालने में सक्षम हैं। डीसी के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए अदालत ने फिलहाल गृह सचिव को तलब नहीं किया। साथ ही, प्रतिवादी संख्या 9 और 10 को भी तत्काल नोटिस जारी नहीं किया गया।
28 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने डीसी और एसपी को निर्देश दिया कि सुनवाई के दौरान उन्होंने जो बातें कही हैं, उनके संबंध में शपथपत्र दाखिल करें। यह शपथपत्र अगली सुनवाई की तारीख से पहले या उसी दिन अदालत में पहुंच जाना चाहिए। मामले को 28 अक्टूबर 2026 को दिन के पहले मामले के रूप में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अदालत ने फिलहाल जिला प्रशासन के आश्वासन के आधार पर मामले को स्थगित किया है।
