वायरल वीडियो और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका के बाद बोकारो प्रशासन एक्शन मोड में है। डीसी अजय नाथ झा ने नजारत और भवन प्रमंडल कार्यालय का औचक निरीक्षण कर जांच के आदेश दिए हैं। 1 जुलाई से वित्तीय ऑडिट शुरू होगा, जबकि वायरल वीडियो मामले में एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।
Bokaro: भवन प्रमंडल कार्यालय से जुड़े वायरल वीडियो और वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। शनिवार को उपायुक्त अजय नाथ झा ने समाहरणालय स्थित जिला नजारत कार्यालय और कैंप-2 स्थित भवन प्रमंडल कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वित्तीय नियमों के उल्लंघन या किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई होगी।

1 जुलाई से होगी जिला नजारत कार्यालय की जांच
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने रोकड़ पंजी, अभिलेख पंजी, कंटिजेंट रजिस्टर, आवंटन पंजी समेत विभिन्न वित्तीय अभिलेखों की जांच की। उन्होंने अधिकारियों को सभी पंजी नियमित रूप से अद्यतन रखने का निर्देश दिया। डीसी ने कहा कि जिला नजारत कार्यालय से विभिन्न आकस्मिक व्यय किए जाते हैं। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला लेखा जांच समिति एक जुलाई से विस्तृत जांच शुरू करेगी। उन्होंने जिला नजारत उप समाहर्ता राज शर्मा को स्टॉक पंजी, रोकड़ पंजी सहित सभी अभिलेखों का सत्यापन कर जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

जिस मद के लिए आवंटन, उसी में खर्च हो राशि
उपायुक्त ने सभी विभागों को वित्तीय नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश देते हुए कहा कि जिस कार्य के लिए राशि आवंटित की गई है, उसका उपयोग उसी मद में किया जाए। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
वायरल वीडियो पर भी शुरू हुई जांच
हाल ही में भवन प्रमंडल कार्यालय से संबंधित वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने वहां भी औचक निरीक्षण किया। कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता और अन्य कर्मियों से पूरे मामले की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने बताया कि विभाग में 50 लाख रुपये तक की निविदाओं का निष्पादन ऑफलाइन प्रक्रिया से किया जाता है। संबंधित निविदा की प्रक्रिया दोपहर एक बजे तक पूरी हो चुकी थी और केवल दो आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद निर्धारित समय के बाद कुछ संवेदकों के बीच राशि के आदान-प्रदान की बात सामने आई। उस समय कार्यालय का एक आउटसोर्स कर्मी भी वहां मौजूद था।
एक सप्ताह में मांगी जांच रिपोर्ट
उपायुक्त ने अपर समाहर्ता सुनील चन्द्र को सभी संबंधित संवेदकों और कार्यालय कर्मियों को नोटिस जारी कर उनका बयान दर्ज करने तथा पूरे मामले की विस्तृत जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय की गरिमा और कार्य संस्कृति बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

