Bokaro : जिले में बुधवार को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर सिविल डिफेंस एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास के जरिए किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थिति में जिला प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय और राहत-बचाव व्यवस्था की तैयारियों का परीक्षण किया गया।

समेकित नियंत्रण कक्ष से ऑपरेशन की हुई निगरानी
निर्धारित परिदृश्य के तहत घटना की सूचना मिलते ही उपायुक्त अजय नाथ झा समेकित नियंत्रण कक्ष (सीसीआर) पहुंचे और पूरे अभियान की निगरानी की। पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा भी नियंत्रण कक्ष पहुंचे और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सीसीआर से राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की गई। इससे पहले उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार और प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन भी नियंत्रण कक्ष पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।

उषा पेट्रोल पंप के पास घटनास्थल पर चला राहत-बचाव अभ्यास
मॉक ड्रिल के दौरान उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक उषा पेट्रोल पंप स्थित घटनास्थल पहुंचे, जहां राहत और बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। इस दौरान अग्निशमन विभाग ने आग पर काबू पाने, घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। वहीं पुलिस टीम ने घटनास्थल की घेराबंदी, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था का अभ्यास किया। जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, सिविल डिफेंस समेत कई विभागों ने संयुक्त रूप से इस अभ्यास में भाग लिया।
सदर अस्पताल और बीजीएच में जांची गई आपात चिकित्सा व्यवस्था
मॉक ड्रिल के तहत उपायुक्त अजय नाथ झा और एसपी नाथू सिंह मीणा ने सदर अस्पताल और बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) पहुंचकर चिकित्सा व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से घायलों के उपचार की तैयारियों की जानकारी ली। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सभी संसाधनों को तैयार रखा जाए। चिकित्सकों की टीम को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा गया।
आपदा प्रबंधन प्रणाली की परखी गई क्षमता
मॉक ड्रिल के दौरान आपातकालीन सूचना तंत्र, संचार व्यवस्था, राहत एवं बचाव अभियान, चिकित्सा सहायता, अग्निशमन व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की क्षमता का परीक्षण किया गया। अभ्यास के बाद अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की और भविष्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुधार बिंदुओं पर चर्चा की।
“मॉक ड्रिल से आपदा प्रबंधन क्षमता का हुआ व्यावहारिक परीक्षण”: DC
उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में जिला प्रशासन और सभी संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता, आपसी समन्वय और तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण करना था। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास से विभिन्न विभागों की तैयारियों का आकलन हुआ और वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण अनुभव मिला। डीसी ने कहा कि सभी विभागों ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार समयबद्ध और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, जो जिले की मजबूत आपदा प्रबंधन तैयारियों को दर्शाता है।
“हर आपदा चुनौती से निपटने को पुलिस तैयार”: SP
पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा ने कहा कि सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपात स्थिति में पुलिस और अन्य एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय को परखना था। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस, क्यूआरटी, स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस, जिला प्रशासन और अन्य टीमों ने निर्धारित समय में घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। एसपी ने कहा कि इस तरह के नियमित अभ्यास भविष्य में किसी भी आपदा या आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मॉक ड्रिल को सफल बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा समेत सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मियों की अहम भूमिका रही।

