Bokaro: झारखंड के बोकारो जिले की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने गुरुवार को रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (Special Judge) देवेश कुमार त्रिपाठी की अदालत ने अपनी ही 11 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले कलयुगी पिता और उसके सहयोगी मित्र को दोषी करार देते हुए ताउम्र कैद की सजा सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने दोनों दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है। यह पूरा मामला पीड़िता की मां द्वारा बालीडीह थाना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर चला, जिसमें उन्होंने अपने ही पति और उसके मित्र पर इस जघन्य अपराध का आरोप लगाया था।

नौ महीने में आया अदालत का फैसला
विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) रविशंकर चौधरी के अनुसार, “यह हृदयविदारक घटना मार्च 2025 की है। आरोपी पिता अपनी मासूम बेटी को घर से दवा दिलाने के बहाने बाहर ले गया था। वह बच्ची को लेकर एक निश्चित स्थान पर पहुंचा, जहां उसका मित्र कार लेकर आया। इसके बाद दोनों आरोपी बच्ची को एक सुनसान इलाके में ले गए, जहां पिता के दोस्त और फिर स्वयं पिता ने मासूम के साथ दुष्कर्म किया। घर लौटने के बाद डरी-सहमी बच्ची ने अपनी मां को पूरी आपबीती सुनाई, जिसके तुरंत बाद मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।”
आजीवन कारावास

मुकदमे के दौरान विशेष न्यायाधीश देवेश कुमार त्रिपाठी ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को बेहद पुख्ता माना। न्यायालय ने फोरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के आधार पर दोनों को दोषी पाया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में दोनों दोषियों को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही, धारा 4 के तहत 25-25 साल के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने का आदेश दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, लेकिन जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को तीन-तीन साल की अतिरिक्त कठोर कैद काटनी होगी।



