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बोकारो को विशेष रंगों से सजाकर विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा मिथिला सांस्कृतिक परिषद: अमरेंदु प्रकाश, BSL


Bokaro: बोकारो की प्रतिष्ठित सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद् का मुख्य वार्षिक उत्सव 56वां दो दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह शनिवार शाम को शुरु हुआ।

परिषद् द्वारा संचालित सेक्टर 4 स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित इस भव्य आयोजन का उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि बीएसएल के निदेशक प्रभारी अमरेन्दु प्रकाश, विशिष्ट अतिथि बोकारो के एसपी चंदन झा, परिषद् के अध्यक्ष अनिल कुमार, उपाध्यक्ष अनिमेष कुमार झा, राजेन्द्र कुमार व महासचिव अविनाश कुमार झा, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष हरि मोहन झा, मिथिला महिला समिति की अध्यक्ष सीमा झा ने दीप प्रज्ज्वलित कर व महाकवि विद्यापति की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया।

इसके पूर्व कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ रंजीत कुमार झा व सहयोगियों द्वारा स्वस्तिवाचन से हुआ। सुप्रसिद्ध गायक अरुण पाठक ने मंगलगीत ‘मंगलमय दिन आजु हे…’ की सुमधुर प्रस्तुति की। तत्पश्चात् उदीयमान कलाकार गुनगुन मजुमदार ने ‘जय-जय भैरवि असुर भयाउनि…’ गीत पर भावनृत्य की सुंदर प्रस्तुति की। अतिथियों के सत्कार में मिथिला महिला समिति की सदस्याओं ने स्वागत गीत ‘आहां अतिथि भगवान यौ…’ प्रस्तुत किया।

इस बीच बोकारो, बीएसएल और मानवता के उत्थान में सेल चेयरमैन के रूप में चुने गए बीएसएल के निदेशक प्रभारी अमरेंदु प्रकाश के अवदानों पर सुंदर वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया। अपने सम्बोधन में निदेशक प्रभारी श्री प्रकाश ने कहा कि ‘बोकारो मेरी मातृभूमि के समान रही है।

मैंने अपनी जिंदगी के तीन दशक से अधिक समय यहीं बिताए हैं। हर शहर का अपना एक रंग होता है। बोकारो का भी विशेष रंग है। इसे विभिन्न तरह के रंगों से सजाने-संवारने तथा इस शहर के विकास में मिथिला सांस्कृतिक परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।’ उन्होंने परिषद के कार्यों एवं गतिविधियों की सराहना करते हुए अपनी शुभेच्छाएं व्यक्त कीं।

इसके बाद परिषद के कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार झा, संयुक्त सचिव समरेन्द्र झा, सहायक सचिव अविनाश झा अवि, सुनील चौधरी, मिहिर झा राजू, नीरज चौधरी, गंगेश पाठक आदि द्वारा पुष्प गुच्छ एवं मिथिला की परंपरानुसार पाग, डोपटा व मिथिला पेंटिंग भेंट कर किया गया।

परिषद् के अध्यक्ष अनिल कुमार झा ने स्वागत भाषण तथा महासचिव अविनाश कुमार झा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। एसपी चंदन झा ने परिषद् के गतिविधियों की सराहना की और महाकवि विद्यापति को मिथिला की संस्कृति का धरोहर बताया। इस क्रम में अतिथियों ने परिषद् के स्मारिका का विमोचन भी किया। उद्घाटन सत्र का मंच संचालन शिक्षिका मीनू रानी मिश्रा व धन्यवाद ज्ञापन परिषद् के उपाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार ने किया। उद्घाटन सत्र के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक शंभु झा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

सिंदूर पिठार ल’क अरिपन केलौंं कनि अबियौ काली…’


समारोह के प्रथम दिन बाहर से आमंत्रित कलाकारों में दिलीप दरभंगिया, रुपेश कुमार सिंह, गायिका डॉली सिंह, परिषद् के महासचिव अविनाश कुमार झा, प्रेस सचिव व गायक अरुण पाठक, गायिका करिश्मा प्रसाद एवं मिथिला महिला समिति की सदस्याओं ने मैथिली गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को घंटों बांधे रखा। मिथिला के जाने माने गायक दिलीप दरभंगिया ने ‘मैया कत’ सुतल छी.. ‘, ‘सिंदूर पिठार ल’क अरिपन केलौंं कनि अबियौ काली…’, ‘उगना रे मोर कतय गेला… ‘, ‘अपन मिथिले में मंदिर बनेबै… ‘ की सुमधुर प्रस्तुति से समां बांध दिया।

ख्याति प्राप्त गायिका डॉली सिंह ने मिथिला वर्णन ‘सिया जी बहिनिया हमार हो.. ‘, ‘मोरा रे अंगनवा चंदन केर गछिया… ‘, ‘किए ऑनलाइन रहबै… ‘, रुपेश कुमार सिंह ने मिथिला वर्णन ‘अपन मिथिला के गाथा हम सुनू एखने सुनाबै छी…’, ‘अंबे आब उचित नहि देरी… ‘ व डॉली सिंह के साथ युगल गीत ‘सीता राम दुल्हा दुल्हिन हमर भगवान… ‘ की सुंदर प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। परिषद के महासचिव अविनाश कुमार झा ने गायिका करिश्मा प्रसाद के साथ युगल गीत ‘हमर मोनक गाम में ई शोर भ’ गेलै, अहां एलियै अन्हार में ईजोत भ’ गेलै… ‘, गायक अरुण पाठक ने ‘बड़ा नीक लागय हमरा गामक गुजरिया..’ सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। मंच संचालन सुनील कुमार मिश्र ने किया। कार्यक्रम में मैथिली पुस्तकों का स्टॉल ‘पोथी घर’ भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।

आज मैथिली नाटक ‘बड़का साहेब’ का मंचन रहेगा आकर्षण का केन्द्र
महासचिव अविनाश कुमार झा व सांस्कृतिक कार्यक्रम निर्देशक शंभु झा ने बताया कि समारोह के दूसरे दिन रविवार की शाम स्थानीय कलाकारों द्वारा संक्षिप्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद स्व. लल्लन प्रसाद ठाकुर द्वारा लिखित मैथिली नाटक ‘बड़का साहेब’ का मंचन होगा। कार्यक्रम में किरण मिश्रा, अमिता झा, नीना नारायण, गणेश चन्द्र झा, बलराम चौधरी, जय प्रकाश चौधरी, पी के झा, बटोही कुमार, श्रीमोहन झा, सुनील मोहन ठाकुर, गंगेश पाठक, ममता झा, बीनू चौधरी, मधुबाला झा, वंदना झा, गुड़िया झा सहित काफी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।


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