Bokaro Steel Plant (SAIL) Hindi News

बताईये अब क्या बचा ! बच्चे के डिलीवरी के लिए BGH से डॉक्टरों ने महिला को रेफर किया मुस्कान अस्पताल


Bokaro: आये दिन अपने गिरते चिकित्सा-व्यवस्था के चलते सुर्खियों में रहने वाले बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) में फिर एक घटना हुई. डिलीवरी कराने भर्ती हुई एक महिला मरीज को डॉक्टरों ने मुस्कान अस्पताल भेज दिया.

यह मामला सामने नहीं आया होता, अगर उक्त महिला प्राइवेट पेशेंट होती, पर वह बीएसएल कर्मी की पत्नी थी. इसलिए ट्रेड यूनियन और बीएसएल कर्मियों ने इस घटना को लेकर जमकर हंगामा किया. पूरी घटना की सुचना सेल-बीएसएल प्रबंधन के आला अधिकारियों को दी. इस घटना ने तूल पकड़ा हुआ है और बीजीएच की जमकर किरकिरी हो रही है.

राज्य में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सरकार है. जेएमएम का ट्रेड यूनियन जय झारखण्ड मजदुर समाज (JJMS) इस पूरी घटना का खुलकर विरोध कर रहा है.

लोग कह रहे है, एक समय पूर्वी भारत के नामचीन और बड़े अस्पतालों में शुमार – बीजीएच – की व्यवस्था या प्रबंधन की मनसा इतनी दयनीय हो गई है की बच्चे के डिलीवरी के लिए भी यहां से मरीजो को रेफेर कर दिया जा रहा है. वह भी उन छोटे अस्पतालों में जहां से मरीज पहले रेफेर होकर बीजीएच आते थे. Video News:

इस कदर हुए चिकित्सा-व्यवस्था में गिरावट का पूरा ठीकरा लोग बीएसएल और बीजीएच के आला अधिकारियों पर फोड़ रहे है. जेजेएमएस के महामंत्री बी के चौधरी ने बताया कि बीएसएल के कोक ओवेन एन्ड बाई प्रोडक्ट प्लांट में कार्यरत एन्थोनी जोसफ की पत्नी एलिजाबेथ को बीजीएच के डॉक्टरो ने प्रसव पीड़ा के दौरान यह कहते हुए मुस्कान अस्पताल भेज दिया कि बीजीएच में ठीक से डिलीवरी नहीं हो पायगा.

उन्होंने कहा, इतने बड़े अस्पताल बीजीएच में अब बच्चे की डिलीवरी नहीं हो पाना किसी दुर्भाग्य से कम नहीं है. यह बीजीएच प्रबंधन के लापरवाही को दर्शाता है. इस घटना का बीएसएल कर्मचारियों के बीच जमकर विरोध हो रहा है.

बीएसएल कर्मी कह रहे है कि “इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्टर, 910 बेड, 300 करीब डॉक्टर और सैकड़ो नर्स वाले बीजीएच में अब बच्चे कि डिलीवरी भी मरीजों को रेफेर का दिया जा रहा है. इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा”. हर दिन धड़ले से मरीजों को बीजीएच से, खासतौर पर कैसुअलटी से, प्राइवेट अस्पतालो में रेफेर किया जाता है.

बता दें, बीजीएच देश के महारत्न सेल (SAIL) के बोकारो इस्पात संयत्र (BSL) द्वारा संचालित होता है. जो यूनियन स्टील मिनिस्ट्री (Ministry of Steel) के अधीन है. बोकारो और आसपास की जनता बीजीएच में बढ़ते कुव्यवस्था के चलते भाजपा की केंद्र सरकार को कोस रही है.

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यह है पूरा मामला –
चौधरी ने बताया कि – एलिजाबेथ मेरी एन्थोनी गर्भवती होने के पश्चात लगातार बीजीएच में चेकअप कराती रही. प्रसव पीड़ा होने पर जब वह बोकारो जनरल अस्पताल गई, तो शुरुआती इलाज के बाद सम्बन्धित डाक्टर ने उन्हे यह कह कर कि बीजीएच में ठीक से डिलीवरी नहीं हो पायगा, मुस्कान अस्पताल ले जाने के लिए दवाब बनाया. यह सुनकर परिजन घबराहट में उन्हें मुस्कान अस्पताल ले गए. जहाँ उन्हें एडमिट कर लिया गया.  10 जुलाई 2022 को महिला ने जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया. जिसमें एक लड़का दुसरा लड़की थी. जिनका दुर्भाग्यवश देहांत हो गया.

चौधरी ने कहा कि मुस्कान अस्पताल से डिस्चार्ज के वक़्त लाख रूपये से ऊपर का बिल आया. जिसके बाद अन्थोनी जोसफ शाम को जय झारखंड मजदूर समाज कार्यालय आये और अपनी व्यथा सुनाई.  11 जुलाई 2022 को युनियन के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी से मिलकर अस्पताल में उनके नाक के नीचे चल रहे कमीशन के गोरखधंधे के बारे में बताया और सम्बन्धित डाक्टरनी से बिल का भुगतान एवं सस्पेंड करने की मांग की.

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चौधरी ने कहा कि सबसे दुःख की बात यह है कि वार्ता करने गए कार्यकर्ताओं ने पाया की बीजीएच प्रबंधन हिन्दुस्तान-पाकिस्तान सीमा टाइप सीआईएसएफ एवं होमगार्ड तैनात कर रखा था. एक तो बीजीएच में समस्या ही समस्या है. उसके सुधार पर फोकस नहीं है. ऊपर से जब भी कोई शिकायत लेकर जाता है तो हड़काने के लिए CISF और होमगार्ड सामने कर देते है. वार्ता के वक़्त कॉन्फरेंस हाल में भी दर्जनों सीआईएसएफ जवानो को बैठाकर रखा गया था. लेकिन युनियन के कार्यकर्ताओं ने काफी हंगामा किया और सीआईएसएफ के निकलने के बाद ही वार्ता हुई, जिसमें प्रबंधन ने गलती को स्वीकार करते हुए बिल का भुगतान करने एवं सम्बन्धित डाक्टरनी पर एक्सन लेना स्वीकार किया.

बीजीएच –
हालांकि इस मामलें में बीएसएल के प्रवक्ता मणिकांत धान कुछ भी बोलने से बचते रहे, पर बीजीएच के एक डॉक्टर ने गोपनीयता के शर्त पर बताया कि उक्त महिला मरीज का इलाज अच्छे से हो रहा था.  डॉक्टर ने उसकी स्तिथि देखते हुए प्री -मैचुर डिलीवरी की सम्भावना को भांप लिया था. गर्भ में जुड़वाँ बच्चे थे, और समय से पहले डिलीवरी होने पर उनको इनक्यूबेटर की जरुरत पड़ती, जो बीजीएच में उपलब्ध नहीं था. इसलिए उस महिला मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने का सुझाव दिया गया था. इस मामलें में डॉक्टर की कोई गलती, लापरवाही या कोई और मनसा नहीं थी. इस मामलें को बेवजह तूल दिया जा रहा है. बीजीएच का गाईनेकोलॉजी डिपार्टमेंट आज भी इस इलाके का सबसे मॉडर्न और बेहतर विभाग है.

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इस मामलें में किसी को कोई सुझाव देना या कहना हो तो नीचे दिए कमेंट बॉक्स में लिख सकते है–

 

 


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