Bokaro: सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अशोक कुमार पंडा का बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) दौरा इस बार जितना छोटा रहा, उससे कहीं ज्यादा चर्चाओं में रहा। वजह यह नहीं कि उन्होंने क्या कहा, बल्कि यह कि उन्होंने क्या नहीं कहा। चेयरमैन आए, शीर्ष अधिकारियों के साथ अँधेरी रात में बैठक की और अगले दिन सुबह रवाना हो गए।

जानकारी के अनुसार चेयरमैन शनिवार शाम करीब 5:30 बजे बोकारो पहुंचे और रविवार सुबह लगभग सात बजे रवाना हो गए। उनके आगमन को लेकर संयंत्र प्रबंधन ने पूरी गोपनीयता बरती। उनके दौरे की सूचना सीमित अधिकारियों तक ही रखी गई। उन्होंने संयंत्र क्षेत्र का दौरा भी नहीं किया और पूरा कार्यक्रम बोकारो निवास तक ही सीमित रहा।
उच्चस्तरीय बैठक में हुई समीक्षा

बोकारो निवास पहुंचने पर बीएसएल के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन ने उनका स्वागत किया। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इसके बाद आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में केवल निदेशक प्रभारी, कार्यपालक निदेशकों एवं विभिन्न विभागों के प्रमुखों ने भाग लिया। बैठक में उत्पादन, परिचालन, वित्तीय प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने मजदुर संगठनों से देर रात बैठक की।

कर्मियों से संवाद नहीं होने पर उठे सवाल
संयंत्र के कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में सेल के चेयरमैन अपने दौरे के दौरान कर्मचारियों और मध्यस्तरीय अधिकारियों से संवाद करते थे। इस बार ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। पत्रकारों से भी बातचीत नहीं की गई। प्रबंधन ने इस बार चेयरमैन के दौरे को लेकर ऐसी गोपनीयता बरती कि कई कर्मचारियों को उनके आने की जानकारी तब मिली, जब वे वापस जा चुके थे। ऐसे में चेयरमैन का सीमित और गोपनीय दौरा कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
चुनौतियों के दौर में पहुंची थी बड़ी उम्मीद
चेयरमैन का दौरा ऐसे समय में हुआ है जब सेल में मानव संसाधन में कटौती, ठेका श्रमिकों की संख्या में कमी, अधिकारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस), ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजना और विस्थापितों के आंदोलन जैसे कई मुद्दे चर्चा में हैं। वहीं श्रम सेतु उपस्थिति प्रणाली को लेकर ठेकेदार और श्रमिकों के बीच भी असंतोष बना हुआ है। ऐसे माहौल में कर्मचारियों को उम्मीद थी कि चेयरमैन उनसे संवाद कर उनका मनोबल बढ़ाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
श्रमिक संगठनों ने जताई प्रतिक्रिया
जय झारखंड मजदूर समाज के महासचिव बी.के. चौधरी ने बताया कि ठेका श्रमिकों, जिनमें बड़ी संख्या विस्थापित परिवारों की है, की संख्या में कटौती नहीं करने की मांग चेयरमैन के समक्ष रखी गई। साथ ही लंबित ट्रेड यूनियन चुनाव जल्द कराने का भी आग्रह किया गया। उन्होंने कहा कि चेयरमैन का इस तरह सीमित दायरे में दौरा कर लौट जाना सकारात्मक संदेश नहीं देता है।
वहीं KIMS के संग्राम सिंह ने भी चेयरमैन के इस गोपनीय दौरे पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों और श्रमिकों को उनसे संवाद की अपेक्षा थी, जो पूरी नहीं हो सकी।
BSL will continue to strengthen SAIL’s growth trajectory through innovation, teamwork, and a culture of continuous improvement.
SAIL Chairman Ashok Kumar Panda


