Bokaro: शहर में एक मार्मिक दृश्य ने हर दिल को छू लिया, जब एक बेबस पिता अपने 25 वर्षीय बेटे अंकित की जिंदगी बचाने की गुहार लेकर जनता दरबार पहुंचे। आंखों में आंसू, आवाज में कंपन… मानो हर शब्द अपने बेटे की सांसों से जुड़ा हो। अंकित Pulmonary Embolism जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। यह बीमारी फेफड़ों और की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी है।

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परिवार के टूटते हौसले को
पिता की पुकार सुनते ही जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। डीसी अजय नाथ झा, डीडीसी शताब्दी मजूमदार और सिविल सर्जन खुद अंकित के घर पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ उसकी हालत जानी, बल्कि परिवार के टूटते हौसले को थाम लिया। डीसी ने भावुक होकर कहा – “मायूस मत हो, तुम्हारी मुस्कान ही तुम्हारी ताकत है… पूरा बोकारो तुम्हारे ठीक होकर लौटने का इंतजार कर रहा है।”

इंसानियत मिलकर उम्मीद
अंकित अब दिल्ली के मेदांता अस्पताल में इलाज के लिए रवाना होगा। प्रशासन ने इलाज से लेकर सफर तक हर सुविधा सुनिश्चित की है। यह सिर्फ एक खबर नहीं… यह उन धड़कनों की कहानी है, जहां एक पिता की दुआ, एक बेटे की सांसें और इंसानियत मिलकर उम्मीद को जिंदा रखे हुए हैं।

