Bokaro: जिले की एक विशेष अदालत ने 16 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म के प्रयास के मामले में त्वरित न्याय करते हुए आरोपी को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। ए.डी.जे. तृतीय सह विशेष पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश देवेश कुमार त्रिपाठी की अदालत ने आरोपी धनंजय सिंह को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध अपराध करने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

विभिन्न धाराओं में सुनाई गई सजा
बोकारो कोर्ट के स्पेशल लोक अभियोजक (SPP) रविशंकर चौधरी ने कहा कि अदालत ने सजा के बिंदुओं पर सुनवाई करते हुए दोषी धनंजय सिंह को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दंडित किया है। मुख्य रूप से BNS की धारा 65(1)/62 के अंतर्गत उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है, जिसमें जुर्माना अदा न करने की स्थिति में एक वर्ष की अतिरिक्त कैद का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत 4 वर्ष और धारा 12 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा मुकर्रर की गई है। जिसमें जुर्माना न भरने पर क्रमशः छह-छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
6 गवाहों ने पुख्ता किया आरोप

अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए कुल 6 गवाहों को पेश किया गया। इसमें पीड़िता का बयान सबसे अहम रहा। इसके अलावा सूचक (पीड़िता की मां) और जांच अधिकारी (आईओ) की गवाही व चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने धनंजय सिंह को दोषी पाया।

निर्माणाधीन मकान में की थी घिनौनी हरकत
मामला 27 सितंबर 2025 का है। बालीडीह थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता की मां ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि जब वह और उसके पति काम पर गए थे, तब धनंजय सिंह घर आया। उसने पानी पीने के बहाने पीड़िता को घर के पीछे निर्माणाधीन कमरे में बुलाया और उसके साथ जबरदस्ती की।
बड़ी बहन ने बचाई आबरू
जब पीड़िता ने शोर मचाया तो आरोपी ने उसका गला दबाकर जान से मारने की धमकी दी। इसी बीच पीड़िता की बड़ी बहन, जो छत पर थी, आवाज सुनकर नीचे आ गई। उसे देखकर आरोपी मौके से फरार हो गया। शाम को माता-पिता के लौटने पर पीड़िता ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद थाने में मामला दर्ज कराया गया था।

