Tucked deep inside the lush Hisim-Kadla hill range near Dumarkudar village in Kasmar block, about 42 km from the district headquarters, lies a place where faith flows as endlessly as the spring water emerging from its rocky caves. Known as Mrig Khoh, the site is not just a scenic retreat of waterfalls, forests and hills, but a deeply revered spiritual destination linked by local belief to the journey of Lord Ram during his exile.
Jharkhand: बोकारो के कसमार प्रखंड मुख्यालय से लगभग 42 किलोमीटर दूर डुमरकुदर गांव के समीप हिसीम-कदला पहाड़ियों के बीच स्थित मृग खोह आज आस्था, रहस्य और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बनकर उभर रहा है। घने जंगलों, झरनों और पहाड़ी घाटियों से घिरा यह स्थल श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी लगातार आकर्षित कर रहा है।

स्वर्णमृग रूपी मारीच की लोककथा
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम स्वर्णमृग रूपी मारीच का पीछा करते हुए इस क्षेत्र तक पहुंचे थे। कहा जाता है कि मारीच द्वारा छलपूर्वक स्वयं को खोह में छिपाने के बाद भगवान राम ने उस पर बाण चलाया था, जिसके बाद वहां से एक पवित्र जलधारा फूट पड़ी, जो आज भी निरंतर बह रही है।
पदचिह्न और मंदिरों की आस्था
मृग खोह की पहाड़ियों पर भगवान श्रीराम के कथित पदचिह्न श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। यहां दो स्थानों पर मंदिरों का निर्माण किया गया है, जिनमें एक पहाड़ी के नीचे और दूसरा शिखर पर स्थित है। कठिन पगडंडी और सड़क मार्ग के जरिए श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

मकर संक्रांति पर टुसू मेले की भव्यता
प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाला टुसू मेला और मारीच दहन इस स्थल की धार्मिक पहचान को और मजबूत करता है। बड़ी संख्या में लोग यहां जुटकर इस परंपरा को उत्सव के रूप में मनाते हैं।
लोकमान्यता और बढ़ती पहचान
हालांकि किसी भी धार्मिक ग्रंथ में इस स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन लोकमान्यताओं ने इसे पीढ़ियों से आस्था का मजबूत केंद्र बनाए रखा है।
दीपक सावाल की लेखनी में मृग खोह
स्थानीय निवासी और लेखक दीपक सावाल ने मृग खोह से जुड़ी लोककथाओं और मान्यताओं को अपनी लेखनी में विस्तार से दर्ज किया है, जिससे यह स्थल और अधिक चर्चित हुआ है।
पर्यटन विकास की उम्मीदें
वहीं, कसमार की प्रखंड विकास पदाधिकारी Namrata Joshi ने कहा कि मृग खोह क्षेत्र की गहरी आस्था से जुड़ा स्थल है और इसकी धार्मिक मान्यताओं एवं प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह तेजी से एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।

