Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के भविष्य के विस्तार और उत्पादन क्षमता को मजबूत करने के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) एक ऐतिहासिक परियोजना पर काम कर रहा है। इसके तहत देश के स्टील सेक्टर की सबसे लंबी स्लरी पाइपलाइन विकसित की जा रही है, जिसके माध्यम से SAIL की खदानों से आयरन ओर सीधे बोकारो स्टील प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।

यह परियोजना SAIL के लिए अपनी तरह की पहली पहल होगी, जो कच्चे माल की आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाएगी। स्लरी पाइपलाइन के शुरू होने के बाद BSL को आयरन ओर की सतत और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

258 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से जुड़ेगी गुआ और बोलानी खदानें

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत SAIL की गुआ और बोलानी आयरन ओर माइंस से प्रतिवर्ष लगभग 83 लाख टन आयरन ओर बोकारो स्टील प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। खदानों से निकाले गए आयरन ओर को पहले बारीक पीसा जाएगा और पानी के साथ मिलाकर स्लरी तैयार की जाएगी। इसके बाद पाइपलाइन के माध्यम से इसे बोकारो भेजा जाएगा। गुआ और बोलानी खदानों से आयरन ओर को पहले जमदा तक लाया जाएगा, जहां से करीब 258 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन के जरिए इसे बोकारो स्टील प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तैयार होगी पाइपलाइन
इस स्लरी पाइपलाइन को BSL के भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। इसकी क्षमता भविष्य में बढ़ाकर 1.6 करोड़ टन प्रतिवर्ष तक की जा सकेगी। परियोजना में गुआ और बोलानी खदानों पर आधुनिक ओर प्रिपरेशन सुविधाएं, पंपिंग स्टेशन, जमदा में पंपिंग व्यवस्था और बोकारो स्टील प्लांट में रिसीविंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस पाइपलाइन की अनुमानित परिचालन अवधि करीब 30 वर्ष होगी और परियोजना को लगभग साढ़े तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेल रैक पर निर्भरता होगी खत्म, लॉजिस्टिक व्यवस्था होगी मजबूत

वर्तमान समय में बोकारो स्टील प्लांट को आयरन ओर की आपूर्ति रेलवे रैक के माध्यम से होती है। इसमें खदानों से लोडिंग, रेलवे परिवहन और प्लांट में अनलोडिंग जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। रेल रैक की उपलब्धता और परिचालन व्यवस्था पर निर्भरता के कारण कई बार सप्लाई चेन प्रभावित होती है। स्लरी पाइपलाइन शुरू होने के बाद आयरन ओर सीधे और लगातार प्लांट तक पहुंचेगा, जिससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारू होगी।
जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका पर्यावरण अनुकूल स्वरूप है। आयरन ओर के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले पानी को पाइपलाइन के माध्यम से दोबारा खदानों तक पहुंचाकर पुन: उपयोग किया जाएगा।
इससे प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा
बोकारो स्टील प्लांट के चीफ ऑफ कम्युनिकेशन मणिकांत धान ने कहा, “स्लरी पाइपलाइन परियोजना बोकारो स्टील प्लांट के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगी। इससे आयरन ओर की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित होगी तथा प्लांट के भविष्य के विस्तार को मजबूती मिलेगी।”
कम होगी लागत, घटेगा कार्बन उत्सर्जन

स्लरी पाइपलाइन परियोजना से परिवहन लागत में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही रेलवे रैक की आवश्यकता कम होने से लॉजिस्टिक दबाव भी घटेगा। मणिकांत धान ने कहा, “यह परियोजना केवल सप्लाई चेन को बेहतर नहीं बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी। इससे धूल प्रदूषण, डीजल खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। यह स्वच्छ और हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
BSL के विकास में साबित होगी मील का पत्थर
स्लरी पाइपलाइन परियोजना बोकारो स्टील प्लांट को भविष्य के लिए तैयार करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। यह परियोजना न केवल कच्चे माल की आपूर्ति को मजबूत करेगी बल्कि भारत के सतत औद्योगिक विकास और आधुनिक विनिर्माण के लक्ष्य को भी गति देगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
The Bokaro Steel Plant slurry pipeline project is a SAIL initiative to transport iron ore directly from its mines to BSL through a modern pipeline system.
The main slurry pipeline connecting Jamda to Bokaro Steel Plant will be approximately 258 kilometres long.
Iron ore from SAIL’s Gua and Bolani mines will be transported through the pipeline.
The pipeline will ensure uninterrupted iron ore supply, reduce dependence on railway rakes, lower transportation costs and support BSL’s future expansion.
The project will reduce dust pollution, diesel consumption and carbon emissions while promoting water conservation through recycling and reuse.

