Bokaro : पांच साल पहले एक मां का बेटा घर से यह कहकर निकला था कि वह खेलने जा रहा है. शाम ढली, रात हुई और फिर दिन, लेकिन वह वापस नहीं आया. इसके बाद शुरू हुई एक मां की ऐसी तलाश, जिसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा था. रिश्तेदारों से पूछताछ, संभावित ठिकानों पर तलाश और पुलिस से गुहार मां ने अपने 15 वर्षीय बेटे विक्की बैजुन (बदला हुआ नाम) को खोजने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मगर हर कोशिश के बाद हाथ आती थी सिर्फ मायूसी.

फिर भी मां ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा…
करीब पांच साल बाद गुरुवार को वही इंतजार खत्म हुआ. असम के बिस्वनाथ जिले का रहने वाला विक्की बोकारो में अपनी मां के सामने खड़ा था. बेटे को देखते ही मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. वर्षों से सीने में दबा दर्द जैसे एक ही पल में बाहर आ गया.
खेलने निकला था बेटा, फिर कभी घर नहीं लौटा
मार्च 2021 की वह शाम विक्की के परिवार के लिए जिंदगी की सबसे लंबी शाम बन गयी. विक्की घर से खेलने के लिए निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा. शुरुआत में परिवार को लगा कि वह किसी रिश्तेदार या परिचित के यहां गया होगा. देर बढ़ती गयी तो चिंता बढ़ी और फिर तलाश शुरू हुई. परिवार ने महीनों तक उसे ढूंढ़ा. रिश्तेदारों से संपर्क किया, संभावित जगहों पर तलाश की और पुलिस से मदद मांगी. मगर विक्की का कोई पता नहीं चला. मां के लिए हर गुजरता दिन एक सवाल बन गया – “मेरा बेटा कहां है?” उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी. मां ने कहा, “मुझे भरोसा था कि अगर भगवान की इच्छा होगी, तो मेरा बच्चा एक दिन जरूर वापस आएगा.”

पांच साल बाद एक छोटी-सी जानकारी बनी उम्मीद की किरण
विक्की आखिरकार बोकारो पहुंच गया था और एक शेल्टर होम में रह रहा था. लेकिन अपनी पहचान और परिवार के बारे में वह पर्याप्त जानकारी नहीं दे पा रहा था. ऐसे में उसे उसके घर तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी. फिर पिछले महीने एक ऐसी जानकारी सामने आयी, जिसने वर्षों से बंद पड़े उम्मीद के दरवाजे को फिर खोल दिया. विक्की का आधार कार्ड सामने आया. उसमें दर्ज पते ने अधिकारियों को उसके परिवार तक पहुंचने का रास्ता दिखाया.
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), बोकारो की अध्यक्ष लीला देवी ने बताया, “रिकॉर्ड में उसका पता दर्ज था. संभव है कि उसके माता-पिता ने पहले ही उसका आधार कार्ड बनवाया हो. पता मिलते ही हमने तुरंत विवरण का सत्यापन शुरू किया और उसके परिवार को तलाशने की प्रक्रिया तेज कर दी.” इसके बाद सीसीआई और सीडब्ल्यूसी ने असम के संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया. जानकारी की कड़ियां जुड़ती गयीं और आखिरकार विक्की के परिवार तक खबर पहुंच गयी कि उनका बेटा जिंदा है और बोकारो में है.
मां ने बेटे को देखा तो खुद को रोक नहीं सकी
बेटे की खबर मिलते ही विक्की की मां अपने दूसरे बेटे के साथ बोकारो पहुंचीं. वह तीन बच्चों में सबसे बड़ा है. जिस पल मां और बेटे की नजरें मिलीं, उस पल जैसे पांच साल का फासला मिट गया. मां विक्की को देखकर फूट-फूटकर रोने लगीं. यह खुशी के आंसू थे या उन पांच वर्षों के दर्द के, शायद इसे शब्दों में बताना मुश्किल था. लीला देवी ने कहा, “जब मां ने अपने बेटे को सामने देखा, तो वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं. वह बेहद भावुक क्षण था.” मां ने बेटे को अपने करीब लेते हुए कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे भगवान ने मेरा खोया हुआ बच्चा मुझे वापस कर दिया है.” इन शब्दों में पांच साल की पीड़ा, उम्मीद और मां के अटूट विश्वास की पूरी कहानी समा गयी.
काउंसलिंग से खुलती गयी परिवार तक पहुंचने की राह
विक्की के परिवार की तलाश में सीसीआई बोकारो और सहयोग विलेज की टीम ने अहम भूमिका निभायी. टीम ने लगातार उससे बातचीत की और काउंसलिंग के माध्यम से उसके बारे में छोटी-छोटी जानकारियां जुटायीं. एक-एक सुराग को जोड़ते हुए टीम ने असम के बिस्वनाथ जिले के अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा. परिवार की जानकारी का सत्यापन किया गया और सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गयीं. जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, सीसीआई सहयोग विलेज और अन्य संबंधित संस्थाओं के सामूहिक प्रयास से आखिरकार वह दिन आया, जब विक्की को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया.
खत्म हुई एक मां की पांच साल की प्रतीक्षा
जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी अनिता झा ने इस पुनर्मिलन को “बेहद खुशी और संतोष का क्षण” बताया. उन्होंने कहा, “करीब पांच साल बाद विक्की का अपनी मां से मिलना सभी संबंधित लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है.” कभी जिस घर में बेटे की आवाज का इंतजार था, वहां अब उसके लौटने की खुशी है. जिस मां ने पांच साल तक हर दरवाजे पर अपने बेटे को तलाशा, उसकी गोद आखिरकार फिर भर गयी. विक्की की कहानी सिर्फ एक बच्चे के घर लौटने की कहानी नहीं है. यह उस मां की कहानी है, जिसने पांच साल तक अपने दिल में उम्मीद जिंदा रखी. समय बीतता रहा, लेकिन उसका विश्वास नहीं टूटा. और जब बेटा सामने आया, तो शायद उस मां के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खबर यही थी “मेरा बच्चा वापस आ गया.”
