Bokaro: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को कहा कि राज्य में तीरंदाजी के क्षेत्र में देश का प्रमुख केंद्र बनने की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के कई तीरंदाज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। जरूरत है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराया जाए।

मोहन कुमार मंगलम स्टेडियम में राष्ट्रीय रैंकिंग तीरंदाजी प्रतियोगिता का शुभारंभ
राज्यपाल बोकारो के मोहन कुमार मंगलम स्टेडियम में आयोजित National Ranking Archery Tournament के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि झारखंड को देश-दुनिया में ‘लैंड ऑफ आर्चरी’ के रूप में पहचान मिली है। राज्य में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।
सही मार्गदर्शन से विश्व मंच पर पहुंचेंगे युवा
गंगवार ने कहा कि यदि युवा तीरंदाजों को समय पर बेहतर कोचिंग, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे देश ही नहीं बल्कि दुनिया के बड़े खेल मंचों पर झारखंड का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभाओं की शुरुआती स्तर पर पहचान करने पर विशेष जोर दिया।

तीरंदाजी सिखाती है एकाग्रता और अनुशासन
राज्यपाल ने कहा कि तीरंदाजी केवल धनुष से लक्ष्य पर तीर चलाने का खेल नहीं है। यह एकाग्रता, धैर्य, संतुलन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की परीक्षा भी है। उन्होंने कहा कि जब जीवन में लक्ष्य स्पष्ट हो, मन एकाग्र रहे और प्रयास लगातार जारी रहें, तो सफलता की राह धीरे-धीरे स्पष्ट होती जाती है।
राम, अर्जुन और एकलव्य का दिया उदाहरण
भारतीय परंपरा में तीरंदाजी की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने भगवान राम, अर्जुन और एकलव्य का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन महान पात्रों के जीवन में तीरंदाजी केवल युद्ध कौशल नहीं थी, बल्कि समर्पण, एकाग्रता, आत्मसंयम और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक भी रही है। आधुनिक तीरंदाजी ने इस विरासत को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़ाया है।
संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे कोई प्रतिभा
राज्यपाल ने कहा कि गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें योग्य प्रशिक्षक, आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, बेहतर उपकरण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के कारण किसी भी प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोका जाना चाहिए। इसके लिए सरकार, खेल संगठनों और समाज को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
देशभर से पहुंचे करीब 900 खिलाड़ी और अधिकारी
राज्यपाल ने प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे करीब 900 खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और तकनीकी अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रतियोगिता और उनके खेल करियर के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने झारखंड आर्चरी एसोसिएशन, बोकारो जिला आर्चरी एसोसिएशन समेत प्रतियोगिता के आयोजन से जुड़े सभी संगठनों और लोगों को भी बधाई दी।
राष्ट्रीय रैंकिंग तीरंदाजी प्रतियोगिता के आयोजन से बोकारो को राष्ट्रीय स्तर की खेल गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर मिला है। प्रतियोगिता में देशभर से आए तीरंदाजों को उच्चस्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा, वहीं बोकारो की खेल क्षमता को भी राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा।


