Bokaro: राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के समापन अवसर पर दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो के ‘आनंद कक्ष’ में शोध आधारित पोस्टर प्रदर्शनी आयोजित की गई। ‘वन्यजीवों का संरक्षण, प्रकृति का स्पंदन’ और ‘प्रकृति संवारे, जीवन निखारें’ जैसे नारों के जरिए विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

एआई और सैटेलाइट तकनीक से संरक्षण का मॉडल
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और सैटेलाइट ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के उपाय प्रस्तुत किए। हाथियों, लुप्तप्राय बिल्लियों, कछुओं और दुर्लभ सांपों के संरक्षण के साथ सारंडा वन की जैव विविधता और एआई कैमरों से जंगलों की निगरानी जैसे विषयों को पोस्टर व मॉडल के जरिए प्रदर्शित किया गया।
लघु नाटिका से दिखाई वन्यजीवों की पीड़ा
विद्यार्थियों ने लघु नाटिका के माध्यम से वन्यजीवों के सामने उत्पन्न चुनौतियों और उनके प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने की स्थिति को जीवंत किया। प्रस्तुति के जरिए बच्चों ने मानव समाज को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया।

वन्यजीव संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी : प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने कहा कि वन्यजीव और जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। इनका संरक्षण केवल सरकार या वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जंगल और वन्यजीवों को बचाना मानव सभ्यता के सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी है।
वाइल्डलाइफ कॉरिडोर संरक्षण पर जोर
भारत में 2 से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम ‘पर्यावासों को जोड़ना, वन्यजीवों का संवर्धन’ है। इसी संदेश को विद्यार्थियों ने अपने पोस्टर और मॉडल के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
