Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) विस्थापित अप्रेंटिसों के नियोजन की मांग को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बीच बीएसएल प्रबंधन ने सोमवार को अपना पक्ष सार्वजनिक किया। प्रबंधन ने कहा कि अप्रेंटिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं के नियोजन और उन्हें रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया लगातार जारी है। उपलब्ध अप्रेंटिसों को संयंत्र के कार्यों में प्राथमिकता के आधार पर नियोजित कराने के लिए संवेदकों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।
950 अप्रेंटिसों में 204 को मिला संविदा रोजगार
बीएसएल के प्रवक्ता मणिकांत धान ने सोमवार को कंपनी का पक्ष रखते हुए बताया कि, उपलब्ध 950 अप्रेंटिसों की सूची में शामिल 204 युवाओं को 3 अक्टूबर तक संयंत्र में कुशल कामगार के रूप में संविदा पर नियोजन दिया जा चुका है। वहीं 50 से अधिक अन्य अप्रेंटिस सुरक्षा प्रशिक्षण पूरा करने के बाद संविदा नियोजन की प्रक्रिया में हैं। प्रबंधन ने बताया कि बीएसएल के विस्तारीकरण और अन्य परियोजनाओं में आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से होने वाले कुल मैनपावर का 10 प्रतिशत विस्थापितों के लिए आरक्षित किया गया है।

20 हजार करोड़ के विस्तार से रोजगार की उम्मीद
बीएसएल के प्रस्तावित विस्तारीकरण में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाना है। प्रबंधन का कहना है कि इस विस्तार से रोजगार, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे। विस्तार से जुड़े कई टेंडर जारी हो चुके हैं, जबकि कई अन्य टेंडर जल्द आने वाले हैं। प्रबंधन के मुताबिक इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ विस्थापित युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी बनेंगे। अप्रेंटिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं को भी संयंत्र में जल्द से जल्द समायोजित होने में इससे मदद मिलने की उम्मीद है।

BSL बोला- संवाद से ही निकलेगा स्थायी समाधान
प्रबंधन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और रचनात्मक विरोध हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन आंदोलन का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जिससे औद्योगिक माहौल, निवेश और रोजगार प्रभावित न हों। बीएसएल ने संवाद, सहयोग और आपसी समझ को स्थायी समाधान का रास्ता बताया है। प्रबंधन के अनुसार जिला प्रशासन के साथ त्रिपक्षीय वार्ता और अप्रेंटिस संघ के साथ हुई सीधी वार्ता में किए गए वादों को लेकर वह गंभीर और प्रतिबद्ध है।
‘संयंत्र की सुरक्षा, बोकारो की सुरक्षा’
बीएसएल ने संयंत्र की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। प्रबंधन ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट थर्मो-सेंसिटिव संयंत्र है और संवेदनशील गैस पाइपलाइनों सहित अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए तीनों पालियों में कर्मचारी तैनात रहते हैं। प्रबंधन के अनुसार गेट जाम या किसी अन्य कारण से परिचालन में व्यवधान आने पर महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर केवल संयंत्र तक सीमित न रहकर आसपास के बड़े जनसमुदाय की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
BSL को बताया बोकारो की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा
प्रबंधन ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि बोकारो स्टील सिटी और आसपास के क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। संयंत्र प्रत्यक्ष रूप से 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। छोटे कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय विकास भी संयंत्र के स्थिर संचालन और उत्पादन से जुड़े हैं। प्रबंधन ने कहा कि बीएसएल में बनने वाला इस्पात देश की प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं से लेकर भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तक में इस्तेमाल होता है।
पुराने अवरोधों का हवाला, अस्थिरता से बचने की अपील
बीएसएल ने पूर्व में हुए अवरोध और हिंसक विरोध की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों से उत्पादन, वित्तीय प्रदर्शन और विस्तार योजनाएं प्रभावित होती हैं। इससे औद्योगिक निवेश और क्षेत्र में बने विश्वास को भी नुकसान पहुंचता है।
प्रबंधन ने कहा कि ऐसे समय में जब बोकारो में औद्योगिक गतिविधियां और विकास की गति फिर से मजबूत हो रही है, किसी भी तरह की अस्थिरता दुर्भाग्यपूर्ण होगी। संयंत्र के संचालन में बाधा का असर केवल प्रबंधन या कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था, झारखंड में निवेश के माहौल और व्यापक औद्योगिक विकास पर पड़ सकता है।
प्रबंधन की अपील- संवाद से समाधान, टकराव से नहीं
बीएसएल प्रबंधन ने सभी संगठनों और हितधारकों से संयंत्र के निर्बाध संचालन, औद्योगिक शांति और शहर की सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। प्रबंधन ने कहा कि विस्थापितों और अप्रेंटिस युवाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और आपसी सहमति का रास्ता ही सभी पक्षों के हित में है।
