Bokaro: एक समय था जब जिले के कई गांवों में फैली हजारों एकड़ बंजर जमीन किसानों के लिए चिंता का कारण थी। खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होती थी और रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ता था। लेकिन आज वही जमीन हरियाली, खुशहाली और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही है। आम की खेती ने न केवल खेतों की तस्वीर बदली है, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में भी नई उम्मीद जगाई है।

4,500 एकड़ भूमि पर विकसित हुए आम के बाग
बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत वर्ष 2017 से अब तक जिले में लगभग 4,500 एकड़ बंजर भूमि को आम के बागों में तब्दील किया गया है। इस पहल से करीब 5,500 किसान जुड़े हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है, जिन्होंने बागवानी को आय का स्थायी स्रोत बना लिया है। आम के बागों के साथ-साथ इंटरक्रॉपिंग से भी किसानों की आमदनी लगातार बढ़ रही है।
50 टन से अधिक आम उत्पादन ने बढ़ाया उत्साह
इस वर्ष जिले में अब तक 50 टन से अधिक आम उत्पादन दर्ज किया गया है। आम्रपाली, मल्लिका और लंगड़ा जैसी प्रमुख किस्मों के आम बाजार में पहुंच रहे हैं। नौ प्रखंडों के किसानों ने आम्रलिका आम महोत्सव-2026 में भाग लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की।

महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत
आम की खेती ने 900 से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। कई महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। बढ़ी हुई आमदनी से बच्चों की बेहतर शिक्षा, घरों में नई सुविधाएं और परिवारों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। कई प्रवासी मजदूर भी अब गांव लौटकर खेती से जुड़ रहे हैं।
किसानों की मुस्कान सबसे बड़ी उपलब्धि”
महोत्सव में अधिकारियों ने कहा, “किसानों के चेहरे पर दिखने वाली खुशी ही इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है।” बोकारो अब केवल इस्पात नगरी के रूप में नहीं, बल्कि बागवानी और आम उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में भी अपनी नई पहचान बना रहा है।

