Bokaro: जिले में जरूरतमंद बच्चों को सामाजिक एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। सोमवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, प्रायोजन एवं पालक देखरेख अनुमोदन समिति अजय नाथ झा की अध्यक्षता में समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 130 नए बच्चों को प्रायोजन योजना से जोड़ने की स्वीकृति प्रदान की गई।

प्रायोजन योजना के लाभ और लंबित भुगतान की हुई समीक्षा
बैठक के दौरान प्रायोजन योजना के तहत लाभुक बच्चों को दी जा रही सहायता राशि, लंबित भुगतान, नए आवेदनों और विशेष मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने योजना की प्रगति और पात्र बच्चों तक इसका लाभ पहुंचाने की स्थिति से समिति को अवगत कराया।
470 बच्चों को पहले से मिल रहा योजना का लाभ
बैठक में बताया गया कि जनवरी 2026 तक 116 बच्चों को प्रायोजन योजना का लाभ दिया गया है। वहीं, 284 बच्चों को फरवरी 2026 तक तथा इनमें से 23 बच्चों को मार्च 2026 तक का प्रायोजन लाभ उपलब्ध कराया गया है। आवंटन उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ बच्चों का भुगतान लंबित है। वर्तमान में 470 बच्चों को पूर्व से योजना का लाभ मिल रहा है।

दस्तावेजों की जांच के बाद 130 आवेदनों को मिली मंजूरी
बैठक में 130 नए आवेदनों की दस्तावेजीय जांच और सामाजिक अन्वेषण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें स्वीकृति दी गई। हालांकि कुछ आवेदनों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी तथा पात्रता से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण उन पर निर्णय स्थगित रखा गया। समिति ने संबंधित मामलों में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
लोक संवाद और एचआईवी प्रभावित बच्चों के मामलों पर भी चर्चा
बैठक में ‘हम आपको सुनते हैं…’ (लोक संवाद) के माध्यम से प्राप्त छह आवेदनों पर भी विचार किया गया। इसके अलावा एचआईवी प्रभावित बच्चों से संबंधित तीन आवेदनों की भी समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रायोजन योजना के दिशा-निर्देशों पर हुई चर्चा
समीक्षा के दौरान झारखंड बाल प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) दिशानिर्देश-2018 एवं मिशन वात्सल्य मार्गदर्शिका-2022 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति को बताया गया कि झारखंड बाल प्रायोजन दिशानिर्देश-2018 के अनुसार लाभुक परिवार की कुल वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
आय सीमा को लेकर राज्य सरकार के मार्गदर्शन का इंतजार
बैठक में बताया गया कि मिशन वात्सल्य मार्गदर्शिका-2022 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक आय सीमा 72 हजार रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 96 हजार रुपये निर्धारित है। इस संबंध में उपायुक्त-सह-अध्यक्ष ने राज्य सरकार से प्राप्त होने वाले मार्गदर्शन के अनुरूप आगे की कार्रवाई करने की बात कही।
सड़क दुर्घटना में अनाथ हुए चार बच्चों को भी मिलेगा लाभ
बैठक में चंदनकियारी के दूबे काटा मोड़ के समीप सड़क दुर्घटना में मृत दंपति के पुत्र विद्युत मांझी एवं विमल मांझी को प्रायोजन योजना से लाभान्वित करने की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा बालीडीह के जियाडा क्षेत्र में हुई दुर्घटना में मृतक के बच्चों शिवानी कुमारी एवं सौरव कुमार को भी योजना का लाभ देने की मंजूरी प्रदान की गई।
पात्र बच्चों को समय पर लाभ देने का निर्देश
उपायुक्त अजय नाथ झा ने संबंधित पदाधिकारियों को सभी पात्र बच्चों तक योजना का लाभ समय पर पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने और पात्रता के अनुरूप बच्चों को सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में अधिकारी और समिति के सदस्य रहे मौजूद
बैठक में उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, बाल संरक्षण पदाधिकारी अनिता झा, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष एवं सदस्यगण सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।


