Bokaro: बाहर आसमान में बादल बरस रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान में हरियाली अपने पूरे शबाब पर है। लेकिन इस खूबसूरत मानसूनी मौसम के बीच जू के बेजुबान मेहमानों की सुरक्षा को लेकर बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) पूरी तरह सतर्क है। बारिश, नमी और गीलेपन से पशु-पक्षियों को परेशानी न हो, इसके लिए विशेष एहतियाती और देखभाल के उपाय किए जा रहे हैं।
शाकाहारी पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय
मानसून में सबसे पहले शाकाहारी पशुओं के आवासीय शेड को दुरुस्त किया गया है। जरूरी मरम्मत और रखरखाव के साथ शेड को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि बारिश के दौरान पशुओं को सुरक्षित, सूखा और आरामदायक आश्रय मिल सके।
पक्षियों के घोंसलों पर बारिश की मार नहीं
पक्षियों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। उनके शेड को ऊपर और किनारों से प्लास्टिक शीट से ढका गया है, ताकि बारिश का पानी अंदर न पहुंचे और पक्षियों के साथ उनके घोंसले भी सुरक्षित रहें। शेड की छतों की नियमित सफाई कर वहां जमा पत्तियों, कचरे और दूसरे अवशेषों को हटाया जा रहा है। इसका मकसद जलभराव रोकने के साथ-साथ नमी और गंदगी से पैदा होने वाली परेशानी को कम करना है।
खाना-पानी की जगहों पर भी खास नजर
जू में पशु-पक्षियों के भोजन और पेयजल क्षेत्रों की सफाई भी नियमित रूप से की जा रही है। मानसून में नमी के कारण संक्रमण और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में इन जगहों को साफ-सुथरा और स्वास्थ्यकर रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मांसाहारी पशुओं के शेड और भोजन क्षेत्रों की भी लगातार सफाई और देखभाल की जा रही है। कोशिश है कि इन जगहों को अधिक से अधिक सूखा रखा जाए, जिससे अत्यधिक नमी के कारण फंगस और बैक्टीरिया पनपने की संभावना कम हो।
विटामिन-कैल्शियम से सेहत का ‘मॉनसून कवच’
पशु-पक्षियों की सेहत पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उनके आहार में जरूरी विटामिन और कैल्शियम सप्लीमेंट्स शामिल किए जा रहे हैं, ताकि बारिश के मौसम में उनकी सेहत और प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
हिप्पो के इलाके की भी नियमित सफाई
दरियाई घोड़े यानी हिप्पो के क्षेत्र में भी नियमित सफाई और रखरखाव किया जा रहा है। उद्देश्य साफ है—बारिश कितनी भी हो, जू के इन बेजुबान निवासियों के आसपास स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बना रहे। 126 एकड़ में फैला जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान बोकारो की हरियाली और वन्यजीवों का अहम हिस्सा है। ऐसे में मानसून के दौरान इन पशु-पक्षियों की देखभाल सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि शहर के इस वन्यजीव संसार के प्रति जिम्मेदारी का भी हिस्सा है।

