Bokaro: जिले के महुआटांड़ थाना क्षेत्र में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष पॉक्सो न्यायालय के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (ADJ-III) देवेश कुमार त्रिपाठी ने आरोपी रामप्रसाद टुड्डू को दोषी करार देते हुए 25 वर्ष के कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

मैदान से लौटते वक्त वारदात को दिया था अंजाम
बोकारो कोर्ट के स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (SPP) रविशंकर चौधरी ने बताया कि मामला महुआटांड़ थाना क्षेत्र के बड़कीपुनु गांव का है। पीड़िता के पिता ने थाने में दर्ज शिकायत में बताया था कि 11 जनवरी 2025 की शाम उनकी 15 वर्षीय बेटी पानी लेकर शौच के लिए मैदान गई थी। लौटने के दौरान गांव के ही रामप्रसाद हुडू ने उसे जबरन उठाकर आंगनबाड़ी केंद्र के पास स्थित टांड़ में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

परिजनों ने खोजबीन की तो भागा आरोपी
काफी देर तक बेटी के घर नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान आरोपी पीड़िता को छोड़कर मौके से फरार हो गया। रोती-बिलखती किशोरी घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने महुआटांड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
FSL रांची की डीएनए रिपोर्ट और 12 गवाहों ने तय की सजा

मामले की सुनवाई के दौरान कुल 12 गवाहों की गवाही हुई, जिनमें पीड़िता, सूचक और अनुसंधान पदाधिकारी भी शामिल थे। अदालत में प्रस्तुत फॉरेंसिक साइंस लैब की DNA रिपोर्ट आरोपी के खिलाफ अहम साक्ष्य साबित हुई। विशेष न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत आरोपी को दोषी ठहराते हुए पीड़िता को चार लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए मुस्तैदी से पैरवी की। मामले में पीड़िता, सूचक (पिता) और अनुसंधान अधिकारी (IO) समेत कुल 12 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए गए।
फैसले का मुख्य आधार: इस पूरे मामले में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रांची से आई डीएनए (DNA) प्रोफाइलिंग रिपोर्ट सबसे बड़ा और अकाट्य वैज्ञानिक सबूत बनी। डीएनए मैच होने की पुष्टि के बाद आरोपी का बचना नामुमकिन हो गया, जिसके आधार पर माननीय न्यायालय ने दोषी को कड़ी सजा मुकर्रर की।

