एक ही संसदीय क्षेत्र में दो शहर, लेकिन आवाज सिर्फ धनबाद के लिए… बोकारो के नेताओं की चुप्पी पर जनता नाराज
Bokaro: बोकारो एयरपोर्ट का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। परिसीमन के बाद धनबाद और बोकारो के अलग-अलग संसदीय क्षेत्र बनने की संभावनाओं के बीच धनबाद सांसद Dhulu Mahto खुलकर धनबाद में एयरपोर्ट की मांग को लेकर मैदान में उतर गए हैं। इधर, बोकारो की जनता इस बात से आहत है कि जिले के लिए कोई प्रभावशाली नेता उसी मजबूती से आवाज नहीं उठा रहा।

इन नेताओ के चुप्पी पर पब्लिक नाराज
लोगों का कहना है कि ढुलू महतो जैसे प्रभावशाली सांसद के धनबाद एयरपोर्ट के लिए लगातार दबाव बनाने से कहीं बोकारो एयरपोर्ट परियोजना पीछे न छूट जाए और ठप न पड़ जाए। इसको लेकर बोकारो के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर बोकारो विधायक श्वेता सिंह (Congress), मेयर भोलू पासवान, बेरमो विधायक कुमार जयमंगल (Congress), पूर्व विधायक बिरंची नारायण (BJP), महानगर अध्यक्ष मंटू यादव (JMM) के चुप्पी से लोग बेहद नाराज हैं।
2016 में साथ मिला था मौका, 2022 में देवघर उड़ गया आगे
बोकारो और Deoghar एयरपोर्ट दोनों को 2016 में उड़ान योजना के तहत शामिल किया गया था। लेकिन जहां देवघर एयरपोर्ट जुलाई 2022 में चालू हो गया, वहीं बोकारो एयरपोर्ट निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक पहली व्यावसायिक उड़ान का इंतजार कर रहा है। देवघर एयरपोर्ट उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उड्डयन मंत्रालय की ओर से बोकारो से जल्द हवाई सेवा शुरू होने का भरोसा दिया गया था। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

संसद से लेकर सड़क पर धरना… बोकारो फिर पीछे?
धनबाद में एयरपोर्ट की मांग को लेकर शुक्रवार को सांसद ढुलू महतो के नेतृत्व में विशाल धरना-प्रदर्शन हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि झारखंड सरकार ने जल्द मंजूरी नहीं दी तो चक्का जाम किया जाएगा। सांसद ने संसद में भी धनबाद एयरपोर्ट को लेकर सवाल उठाया था (2024 में) । इसके जवाब में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत धनबाद एयरपोर्ट का प्रस्ताव आया था, लेकिन भूमि उपलब्धता और राज्य सरकार की सहमति नहीं मिलने से मामला अटका हुआ है। इसके बावजूद भी सांसद धनबाद एयरपोर्ट के लिए लगे हुए है और अब आंदोलन शुरू कर दिया है।
बोकारो की उम्मीदें अभी भी जिंदा
स्थानीय लोगों का कहना है कि बोकारो एयरपोर्ट धनबाद संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए उनसे यह अपेक्षा थी कि वे बोकारो के लिए मजबूती से आवाज उठाएंगे। लेकिन लगातार धनबाद पर फोकस होने से बोकारोवासियों में उपेक्षा की भावना गहराती जा रही है। अब सवाल यही है – क्या बोकारो एयरपोर्ट राजनीतिक प्राथमिकताओं की भेंट चढ़ जाएगा, या जिले को उसका बहुप्रतीक्षित हवाई सपना आखिरकार पूरा होगा ?

