Bokaro : कभी जिसे हराना “नामुमकिन मिशन” माना जाता था, उसे अब एक सरकारी स्कूल की टीम ने टाई-ब्रेकर में 4-3 से चुपचाप, लेकिन पूरी शान के साथ धूल चटा दी। चास प्रखंड स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता (अंडर-17 बालक वर्ग) में उत्क्रमित राजकीयकृत प्लस टू हाई स्कूल लकड़ाखंदा, सेक्टर-2A ने सेल फुटबॉल अकादमी के सितारों से सजी पीएम श्री पंचानन राजबाला प्लस टू उच्च विद्यालय, सतनपुर को बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिस टीम को अब तक “अजेय समझा जाता था”, वह मैदान से बाहर हुई तो खेल प्रेमियों की भौहें भी उठ गईं और चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया—“आखिर ये हुआ कैसे?”

जहां मैदान नहीं, वहां भी कर दिखाया कमाल
लकड़ाखंदा स्कूल के पास खुद का फुटबॉल मैदान नहीं है। सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लगेगा, लेकिन यही इस जीत की सबसे बड़ी कहानी है। जिन बच्चों के पास खेलने के लिए अपना ग्राउंड नहीं, उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ ‘फेवरेट टीम’ को ग्राउंड से बाहर कर दिया। इन खिलाड़ियों का असली मैदान आसपास के गांव और स्लम इलाके रहे, और शायद वही उनकी असली ताकत भी बन गए।

कोच की रणनीति या जादू ?
शारीरिक शिक्षा शिक्षक आशुतोष राय ने खिलाड़ियों को बंद पड़े बोकारो इस्पात विद्यालय के मैदान में ट्रेनिंग दी। आधुनिक उपकरणों की कमी को उन्होंने बहाने नहीं, बल्कि मेहनत से मात देने की रणनीति बना ली। गर्मी की छुट्टियों में भी अभ्यास जारी रहा और नतीजा – सेल अकादमी की “अजेय दीवार” में पहली दरार।
मैच का नतीजा: रोमांच, उलटफेर और थोड़ा सा सदमा
पूरा मैच ऐसा था जैसे तय स्क्रिप्ट को किसी ने आखिरी ओवर में फाड़कर फेंक दिया हो। सेल अकादमी की टीम जहां अपने नाम के बोझ के साथ उतरी थी, वहीं लकड़ाखंदा के खिलाड़ी सिर्फ एक ही चीज लेकर आए थे – जीत का जिद्दी इरादा। टाई-ब्रेकर में 4-3 का स्कोर सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि एक संदेश बन गया – “फुटबॉल में नाम नहीं, खेल चलता है!”
अब सवाल भी उठेंगे और तालियां भी बजेंगी
छह बार की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय चैंपियन टीम का इस तरह बाहर होना कई सवाल छोड़ गया है, लेकिन लकड़ाखंदा के लिए यह जीत एक कहानी है – जहां मैदान नहीं था, लेकिन मैदान मार लिया गया।

