Bokaro: जब सोच नई हो और नजरिया अलग, तो छोटे-छोटे विचार भी बड़े बदलाव की नींव बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया जीजीपीएस सेक्टर-5 के पूर्व छात्रों ने, जिन्होंने अपनी रचनात्मकता को दिशा देते हुए एग्रो गार्ड सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनी खड़ी कर दी। यह पहल न केवल उनकी प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्टार्टअप संस्कृति की जीती जगती तस्वीर है।

विचार से उद्यम तक का प्रेरक सफर
जून 2025 में शुरू हुआ यह सफर एक साधारण विचार से आगे बढ़कर आज कृषि क्षेत्र में नवाचार का उदाहरण बन चुका है। 18 वर्ष के युवाओं की इस टीम में हेड डायरेक्टर शुभम कुमार और निदेशक अनुष्का सिंह व अनुभव विश्वकर्मा है। जिन्होंने पारंपरिक खेती और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बीच की दूरी को कम किया है।
तकनीक के तीन मजबूत चरण
शुभम कुमार ने कहा की उनका स्टार्टअप तीन चरण में है। पहले चरण में मिट्टी की नमी मापने की तकनीक विकसित की गई। दूसरे चरण में IoT के जरिए इसे स्मार्टफोन से जोड़ा गया। और फिर वर्तमान वर्जन 3.0 में स्मार्ट फेंसिंग और पैदावार का अनुमान लगाने वाले एडवांस कैमरे शामिल किये गए, जो किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम
यह स्टार्टअप ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे अभियानों की भावना को साकार करता है। इन समझदार युवाओं की टीम ने इस तकनीक के लिए पेटेंट फाइल किया है और उससे बड़ी बात ये भी है कि उन्होंने अब तक 10 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे दिया है।
गर्व और प्रेरणा की कहानी
शुभम कुमार के पिता अंजनी कुमार सिंह ने इसे मेहनत और देश के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। जीजीपीएस स्कूल के अध्यापकों ने कहा कि यदि युवा अपनी रचनात्मकता को सही दिशा दें, तो वे न केवल अपना भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि देश को भी आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

