Bokaro: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था को आनंददायक, रुचिकर और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शनिवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो में सीबीएसई की एक दिवसीय ‘हैप्पी क्लासरूम’ कार्यशाला आयोजित की गई। सीबीएसई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, पटना के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में शिक्षकों को सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के गुर बताए गए।


सकारात्मक माहौल से निखरेगा विद्यार्थियों का व्यक्तित्व
कार्यक्रम का उद्घाटन सीबीएसई सिटी कोऑर्डिनेटर सह डीपीएस बोकारो के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने रिसोर्स पर्सन्स के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि खुशहाल कक्षा का अर्थ केवल हंसी-मजाक नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण है, जहां विद्यार्थी सुरक्षित, सहज और प्रसन्न महसूस करें। खुशहाल शिक्षक ही आनंदित विद्यालय और सकारात्मक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बच्चों से भावनात्मक जुड़ाव जरूरी : अभिषेक कुमार
कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन जीजीपीएस, सेक्टर-5 के प्राचार्य अभिषेक कुमार ने कहा कि आदर्श कक्षा के लिए शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव जरूरी है। शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं और जरूरतों को समझना चाहिए। उन्होंने प्रस्तुतीकरण और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के व्यावहारिक सुझाव दिए।

समावेशी और आनंददायक शिक्षा पर जोर
दूसरी रिसोर्स पर्सन एवं जीजीपीएस की वरीय शिक्षिका सुषमा सिंह ने कक्षा को सक्रिय, समावेशी और सकारात्मक बनाए रखने में शिक्षक की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने कहा कि बच्चों के सपनों को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षकों का स्वयं प्रसन्न और सकारात्मक रहना आवश्यक है। कार्यशाला में आयोजित विभिन्न गतिविधियों से शिक्षकों को अपनी शिक्षण शैली में सुधार करने का अवसर मिला।
