Bokaro: ज़िले में सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासन और आम लोगों के बीच विश्वास की डोर को और मजबूत कर दिया। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कई दिनों से अनशन पर बैठे चास निवासी सतीश जायसवाल को शायद उम्मीद थी कि उनकी आवाज किसी दिन प्रशासन तक पहुंचेगी। लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी पीड़ा सुनने के लिए स्वयं उपायुक्त अजय नाथ झा उनके पास पहुंच जाएंगे।

जब डीसी ने अचानक रुकवा दी अपनी गाड़ी
समाहरणालय से निकलते समय उपायुक्त की नजर सड़क किनारे चल रहे अनशन पर पड़ी। गाड़ी आगे बढ़ चुकी थी, लेकिन अनशनकारी की तस्वीर उनके मन में ठहर गई। उन्होंने तुरंत चालक को वाहन रोकने और वापस अनशन स्थल की ओर ले जाने का निर्देश दिया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था।
समस्याएं सुनीं, भरोसा भी दिया
अनशन स्थल पर पहुंचकर उपायुक्त ने सतीश जायसवाल से आत्मीयता के साथ बातचीत की। उन्होंने उनकी मांगों और परेशानियों को गंभीरता से सुना। केवल आश्वासन देकर आगे बढ़ जाने के बजाय उन्होंने मौके पर ही चास अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल ढांडा को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

भरोसे की जीत, खत्म हुआ अनशन
उपायुक्त के संवेदनशील व्यवहार और सकारात्मक पहल से प्रभावित होकर सतीश जायसवाल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। कई दिनों की प्रतीक्षा के बाद जब प्रशासन खुद उनके पास पहुंचा, तो उनके चेहरे पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।
लोगों ने कहा- प्रशासन अभी भी सुनता है
घटना के दौरान मौजूद लोगों ने भी उपायुक्त की संवेदनशीलता और मानवीय पहल की सराहना की। यह केवल एक अनशन खत्म होने की कहानी नहीं थी, बल्कि उस भरोसे की वापसी थी, जो आम नागरिकों को यह संदेश देती है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है।

