Bokaro: लगातार हो रही बारिश का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखने लगा है। कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से बोकारो जिले के चार कोयला आधारित बिजली संयंत्र सीमित और इमरजेंसी स्टॉक के भरोसे चल रहे हैं। बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड (BPSCL) और तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (TTPS) में करीब पांच दिनों का ही कोयला बचा है। वहीं, डीवीसी के बोकारो थर्मल पावर स्टेशन (BTPS) और चंद्रपुरा थर्मल पावर स्टेशन (CTPS) में करीब सात दिन का कोयला बचा है।

कोयले की आपूर्ति में सबसे बड़ा बदलाव रेलवे रैक की संख्या में आया है। जहां सामान्य दिनों में नियमित रूप से रैक पहुंचती थी, वहीं अब कम संख्या में रैक पहुँच रही जिससे आपूर्ति में कमी हो रही है। इससे बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है और बोकारो सहित झारखंड के कई हिस्सों में बिजली कटौती की समस्या भी बढ़ी है।
TTPS में 30 हजार टन कोयला, चार-पांच दिन का स्टॉक

तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन की दोनों चालू इकाइयों की कुल क्षमता 420 मेगावाट है। फिलहाल करीब 325 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। प्लांट में लगभग 30 हजार मीट्रिक टन कोयला बचा है, जो मौजूदा खपत के हिसाब से करीब चार से पांच दिन के लिए पर्याप्त है। TTPS को प्रतिदिन करीब 7,000 मीट्रिक टन कोयले की जरूरत होती है, लेकिन फिलहाल केवल एक रेलवे रैक मिल रही है, जिसमें करीब 3,200 मीट्रिक टन कोयला आता है।

TTPS के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार शर्मा ने कहा, “कोयले का संकट जरूर है, लेकिन दोनों यूनिट में बिजली उत्पादन सामान्य रखने की पूरी कोशिश की जा रही है। हम इमरजेंसी स्टॉक पर चल रहे हैं। एक महीने से अधिक समय तक कोयले की आपूर्ति प्रभावित रहने के कारण पहले जमा स्टॉक का भी इस्तेमाल हो चुका है।” बताया जा रहा है कि TTPS की पूरी बिजली JUVNL को जाती है, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों में बिजली की आपूर्ति करता है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित होने पर इसका असर रांची, जमशेदपुर, धनबाद समेत कई इलाकों पर पड़ सकता है।
BPSCL में उत्पादन 200 से घटकर 170 मेगावाट

बोकारो स्टील प्लांट को पूरी बिजली आपूर्ति करने वाले BPSCL में भी स्थिति चिंताजनक है। सामान्य दिनों में करीब 200 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट में उत्पादन घटकर लगभग 170 मेगावाट रह गया है। प्लांट में करीब 20 हजार मीट्रिक टन कोयला बचा है, जो पांच से छह दिनों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। BPSCL को प्रतिदिन करीब 4,000 मीट्रिक टन कोयले की जरूरत होती है। पहले रोजाना एक रेलवे रैक मिलती थी, लेकिन अब दो से तीन दिन के अंतराल पर रैक पहुंच रही है। कोयले की कमी के बीच पिछले कुछ दिनों से बोकारो स्टील सिटी के टाउनशिप क्षेत्र में बिजली कटौती की शिकायतें भी बढ़ी हैं।
BTPS में सात दिन का स्टॉक, CTPS की स्थिति भी समान

DVC के 500 मेगावाट क्षमता वाले बोकारो थर्मल पावर स्टेशन में करीब 40 हजार मीट्रिक टन कोयला बचा है, जो लगभग सात दिनों के लिए पर्याप्त है। BTPS के प्रोजेक्ट हेड सुशील कुमार अजरिया ने कहा, “फिलहाल बिजली उत्पादन सामान्य है, लेकिन CCL से कोयले की आपूर्ति सीमित हो गई है। सामान्य दिनों में तीन रैक के अलावा सड़क मार्ग से भी कोयला मिलता है। अभी आपूर्ति घटकर दो रैक प्रतिदिन रह गई है, जिससे स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा है।” चंद्रपुरा थर्मल पावर स्टेशन की स्थिति भी लगभग ऐसी ही बताई जा रही है।
खुले खदानों में बारिश से धीमा हुआ उत्पादन
अधिकारियों के अनुसार लगातार बारिश का सीधा असर कोयला उत्पादन और परिवहन पर पड़ा है। CCL की अधिकांश खदानें ओपनकास्ट हैं, जहां बारिश के दौरान खनन गतिविधियां धीमी हो जाती हैं। इसके कारण खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने में भी दिक्कत आ रही है। अगर बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पावर प्लांटों के उत्पादन और झारखंड की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।
