Bokaro: बोकारो के तेलों गांव से निकली यह कहानी सिर्फ एक टॉपर की नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और सपनों की है। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के छात्र सोनू कुमार ने 97.6% अंक लाकर जिला टॉप किया, लेकिन इस सफलता के पीछे उनके पिता भुवनेश्वर महतो की अथक मेहनत और संघर्ष की लंबी कहानी छिपी है। एक बिजली मिस्त्री के रूप में वे दिन-रात गांव में काम कर परिवार का भरण-पोषण करते रहे, ताकि बेटे की पढ़ाई कभी रुक न जाए।

छोटी दुकान, बड़े सपनों का सहारा
भुवनेश्वर महतो की गांव में बिजली सामान की एक छोटी-सी मरम्मत की दुकान है। सीमित आय में घर चलाना और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था। कई बार आर्थिक तंगी ने राह रोकी, लेकिन पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने सपनों को बेटे की किताबों में समेट दिया। मां अनीता देवी ने भी हर परिस्थिति में परिवार को संभालते हुए बेटे को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
अभावों में भी नहीं टूटा हौसला
सोनू ने कभी संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने पिता की मेहनत को ही अपनी प्रेरणा बनाया। हर दिन पिता को मेहनत करते देख उन्होंने ठान लिया था कि उन्हें कुछ बड़ा हासिल करना है। यही जिद और समर्पण उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक ले गया।

मेहनत, अनुशासन और त्याग का परिणाम
सोनू ने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई को प्राथमिकता दी। शुरुआती दिनों में 4-5 घंटे पढ़ाई करने वाले सोनू ने परीक्षा से पहले अपनी मेहनत को दोगुना कर दिया। कठिन विषयों को समझने के लिए उन्होंने ऑनलाइन माध्यमों का सहारा लिया, लेकिन ध्यान हमेशा लक्ष्य पर ही रखा।
संघर्ष से सफलता तक, बनी प्रेरणा
आज सोनू कुमार की कहानी हर उस परिवार के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखता है। यह सफलता सिर्फ एक छात्र की नहीं, बल्कि एक पिता के संघर्ष, त्याग और विश्वास की जीत है- जिसने यह साबित कर दिया कि मेहनत की रोशनी सबसे घने अंधेरे को भी मिटा सकती है।

