Bokaro: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने अपनी भूमि संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए भूखंडों एवं भूमि के लीज (पट्टा) नवीनीकरण की नई व्यापक नीति लागू कर दी है। 15 मई 2026 से प्रभावी यह नीति लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, स्पष्ट और सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। यह व्यवस्था केवल उन मौजूदा लीज मामलों पर लागू होगी, जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है या जो नवीनीकरण के लिए देय हैं। नए आवंटनों पर यह नीति लागू नहीं होगी।

तीन श्रेणियों में बांटी गईं लीज
नई नीति के तहत लीजधारकों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। पहली श्रेणी में बैंक, बीमा कंपनियां, निजी संस्थान, पेट्रोल पंप, एटीएम और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में केंद्र व राज्य सरकार के विभाग, नगर निकाय, शैक्षणिक संस्थान और ग्रुप हाउसिंग सोसायटी रखी गई हैं। तीसरी श्रेणी में मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, चैरिटेबल अस्पताल, पुस्तकालय तथा महिला एवं दिव्यांग कल्याण से जुड़ी संस्थाओं को शामिल किया गया है।

नवीनीकरण शुल्क में किया गया बदलाव
नई व्यवस्था के अनुसार वाणिज्यिक श्रेणी के लिए वर्तमान भूमि प्रीमियम का 25 प्रतिशत, सरकारी एवं गैर-वाणिज्यिक संस्थाओं के लिए 10 प्रतिशत तथा सामाजिक, धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं के लिए मात्र एक रुपये का टोकन शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा वार्षिक ग्राउंड रेंट और सेवा शुल्क के तीन गुना के बराबर राशि सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा करनी होगी।
डिफॉल्टरों को भी मिला राहत का अवसर
सेल ने उन लीजधारकों को भी राहत दी है, जिनकी लीज नवीनीकरण नहीं होने के कारण समाप्त हो चुकी है। नई नीति लागू होने के एक वर्ष के भीतर नवीनीकरण कराने पर उन्हें दंडात्मक ब्याज से छूट मिलेगी और केवल भारतीय स्टेट बैंक की नकद साख दर के अनुसार साधारण ब्याज देना होगा। निर्धारित अवधि के बाद नवीनीकरण कराने पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण दंडात्मक ब्याज देय होगा।
शहरी विकास को मिलेगा बढ़ावा
सेल प्रबंधन का मानना है कि नई नीति से भूमि संपत्तियों का संरक्षण, कानूनी अनुपालन और शहरी आधारभूत संरचना के सुव्यवस्थित विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता आने से संबंधित संस्थाओं और लीजधारकों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

