स्थानीय राजनीति में चर्चा है कि जिस पुल का आज शिलान्यास हुआ, उसकी परिकल्पना और डीपीआर पूर्व विधायक बिरंची नारायण के कार्यकाल में तैयार हुई थी, जबकि शिलान्यास का श्रेय वर्तमान विधायक श्वेता सिंह के खाते में गया। ऐसे में पुल बनने से पहले ही श्रेय का ट्रैफिक काफी बढ़ गया है।
Bokaro: बोकारो का बारी को-ऑपरेटिव इलाका आज शहर की सबसे तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों में गिना जाता है। चौड़ी सड़कें, अपेक्षाकृत बेहतर बिजली व्यवस्था, पानी की सुविधा और आलीशान मकानों ने इसे शहर के पसंदीदा आवासीय क्षेत्रों में शामिल कर दिया है। शायद यही वजह है कि यहां विकास कार्यों की भी कमी नहीं दिखती।

गरगा नदी पर नए पुल की रखी गई आधारशिला
सोमवार को बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने चास प्रखंड के तेतुलिया मौजा और NH-23 स्थित बारी को-ऑपरेटिव मोड़ के बीच गरगा नदी पर बनने वाले नए उच्चस्तरीय पुल का शिलान्यास किया। विधायक ने कहा कि पुल बनने से आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और तेज होगा तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

शिलान्यास के साथ ही उठने लगे सवाल
पुल का शिलान्यास होते ही इलाके में एक पुराना सवाल फिर चर्चा में आ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर नया पुल बनाया जाना है, वहां पहले से ही एक चौड़ा और मजबूत पुल मौजूद है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में इसी जगह एक और पुल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।
हनुमान नगर की ओर ज्यादा महसूस होती है जरूरत
स्थानीय निवासियों का मानना है कि हनुमान नगर की ओर एक नए पुल का निर्माण अधिक उपयोगी साबित होता। इससे न केवल बारी को-ऑपरेटिव मोड़ पर बढ़ते ट्रैफिक का दबाव कम होता, बल्कि मेडिकल कॉलेज, सेक्टर-12 और पुलिस लाइन क्षेत्र तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग भी उपलब्ध हो जाता।
दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है यह मार्ग
बारी को-ऑपरेटिव मोड़ से उकरीद मोड़ तक NH-23 पर अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कई लोगों की जान भी इन हादसों में जा चुकी है। ऐसे में स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि नया पुल किसी नए मार्ग को खोलता, तो इसका लाभ आम लोगों को अधिक व्यापक स्तर पर मिलता।
पुराने प्रस्ताव और नए श्रेय की चर्चा

राजनीतिक गलियारों में इस परियोजना को लेकर एक और चर्चा भी चल रही है। बताया जाता है कि इस पुल के प्रस्ताव से लेकर डीपीआर तैयार होने तक का श्रेय पूर्व विधायक बिरंचि नारायण पहले ही ले चुके हैं। वहीं हनुमान नगर की ओर प्रस्तावित पुल का टेंडर भी उनके कार्यकाल में हुआ था, लेकिन वह परियोजना आज तक जमीन पर नहीं उतर सकी।
विकास की परिभाषा पर भी हो रही बहस
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि विकास केवल नए निर्माण कार्यों का नाम नहीं है, बल्कि उन स्थानों पर बुनियादी ढांचे का निर्माण करना भी है जहां उसकी सबसे अधिक आवश्यकता हो। ऐसे में हनुमान नगर के तरफ पुल बनाने की मांग लगातार उठ रही है। इस पुल को लेकर, बारी कोआपरेटिव के नए समिति से वहीं की जनता खुश नहीं है। लोग कह रहे है कि वर्तमान समिति को लोगो की जरूरतों को देखते हुए हनुमान नगर वाले पुल पर जोर देना चाहिए था। इस पुल की खास जरुरत नहीं थी।
जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेगा पुल
फिलहाल बारी को-ऑपरेटिव को एक और पुल मिलने जा रहा है। अब देखना यह होगा कि यह पुल केवल गरगा नदी के दो किनारों को जोड़ता है या फिर ट्रैफिक, सुरक्षा और कनेक्टिविटी से जुड़ी स्थानीय समस्याओं का भी समाधान बन पाता है। विधायक मैडम हनुमान नगर वाले पुल का कुछ करती है या नहीं।
विकास कार्य जारी रहने का आश्वासन
शिलान्यास कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग मौजूद रहे। विधायक स्वेता सिंह ने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में बारी को-ऑपरेटिव क्षेत्र में और भी विकास कार्य किए जाएंगे ताकि लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
(By CurrentBokaro Team )

