केंद्र सरकार ने देश की दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) और Steel Authority of India Limited (SAIL) को उनके प्रतिष्ठित ‘महारत्न’ (Maharatna) दर्जे पर बनाए रखने को लेकर एक साल की निगरानी सूची में डाल दिया है। इन दोनों कंपनियों पर मुनाफे के अनिवार्य मानक को पूरा न कर पाने का आरोप है।

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में समीक्षा
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सचिव T.V. Somanathan की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के प्रदर्शन की समीक्षा की। इस दौरान पाया गया कि दोनों कंपनियां टर्नओवर, नेटवर्थ और अंतरराष्ट्रीय संचालन जैसे अन्य मानकों पर तो खरी उतरती हैं, लेकिन मुनाफे की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पा रही हैं।
क्या है महानवरत्न दर्जा?
महारत्न दर्जा देश के चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों को दिया जाने वाला सर्वोच्च कॉर्पोरेट सम्मान है। इस दर्जे के तहत कंपनियों को बड़े निवेश और रणनीतिक फैसलों में अधिक स्वायत्तता मिलती है। उन्हें कई महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बार-बार सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उनकी कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ती है।

वर्तमान में देश में 14 कंपनियां महारत्न श्रेणी में शामिल हैं, जिनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं-
- Bharat Heavy Electricals Limited
- Bharat Petroleum Corporation Limited
- Coal India Limited
- GAIL (India) Limited
- Hindustan Aeronautics Limited
- Hindustan Petroleum Corporation Limited
- Indian Oil Corporation Limited
- NTPC Limited
- Oil and Natural Gas Corporation
- Oil India Limited
- Power Finance Corporation
- Power Grid Corporation of India Limited
- REC Limited
- Steel Authority of India Limited
SAIL की चुनौती ज्यादा गंभीर क्यों ?
हालांकि दोनों कंपनियां निगरानी सूची में हैं, लेकिन SAIL की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। SAIL ने वित्त वर्ष 2025-26 में बेहतर प्रदर्शन करते हुए Rs 1.10 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व और Rs 3,233 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक वृद्धि है। इसके बावजूद यह कंपनी महारत्न दर्जे के लिए जरूरी लगभग Rs 5,000 करोड़ के औसत वार्षिक लाभ के मानक से अभी भी काफी पीछे है।
बाजार की अस्थिरता और बढ़ता दबाव
SAIL को कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टील की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कच्चे माल की लागत में वृद्धि और निजी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसके मार्जिन पर लगातार दबाव डाल रही है। वैश्विक स्टील बाजार की अनिश्चितता भी कंपनी की स्थिरता को प्रभावित कर रही है।
कर्मचारी और प्रबंधन से जुड़ी चिंता
SAIL में कार्यबल पुनर्गठन और संविदा कर्मचारियों की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी लाने की योजनाओं ने भी कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों के बीच असंतोष बढ़ाया है। जानकारों का मानना है कि इससे कार्य वातावरण और उत्पादकता पर असर पड़ सकता है।
आने वाला एक साल निर्णायक
विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक साल का निगरानी काल दोनों कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जहां BHEL मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ती मांग के चलते स्थिति सुधारने में सक्षम दिख रही है, वहीं SAIL के सामने लाभप्रदता बढ़ाने के साथ-साथ परिचालन दक्षता और कर्मचारियों का भरोसा बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
महारत्न दर्जा बनाए रखना अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह परिचालन दक्षता, बाजार प्रतिस्पर्धा और संगठनात्मक स्थिरता का भी परीक्षण बन गया है और इस परीक्षा में SAIL के लिए राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही है।

