जब सरकार ने लिया बड़ा फैसला-SAIL के हाथों से निकलकर AAI तक पहुंचा राउरकेला एयरपोर्ट
Bokaro: बोकारोवासियों के लिए एयर कनेक्टिविटी का सपना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर सेल के Rourkela Airport को लेकर ओडिशा सरकार और Airports Authority of India के बीच तेजी से काम आगे बढ़ रहा है, वहीं Bokaro Airport अब भी उड़ान संचालन शुरू होने का इंतजार कर रहा है। इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।

सेल के हाथो से निकल गया राउरकेला एयरपोर्ट
बता दें, ओडिशा सरकार राउरकेला हवाई अड्डे को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को हस्तांतरित कर रही है। बोकारो एयरपोर्ट की तरह, राउरकेला एयरपोर्ट, जो Steel Authority of India Limited की इकाई Rourkela Steel Plant के स्वामित्व में है, उसके पूर्ण अधिग्रहण और बड़े विमानों के संचालन के लिए कोड 4C अपग्रेड की दिशा में ओडिशा सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। कुछ हफ्तों पहले इसको लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। जिसमे केंद्रीय इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक, संयुक्त सचिव अभिजीत नरेंद्र, SAIL के कार्यवाहक अध्यक्ष के.के. सिंह, RSP के प्रभारी निदेशक आलोक वर्मा, ओडिशा के मुख्य सचिव अनु गर्ग आदि अधिकारी शामिल हुए थे।
बोकारो भी SAIL की इकाई, फिर अलग व्यवहार क्यों ?
बोकारो एयरपोर्ट भी Bokaro Steel Plant के स्वामित्व में है, जो SAIL की ही इकाई है। ऐसे में स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि यदि राउरकेला के लिए सरकार और AAI मिलकर ठोस रोडमैप तैयार कर सकते हैं, तो बोकारो के लिए वैसी पहल क्यों नहीं ? सबसे बड़ी चिंता यह है कि AAI और BSL के बीच हुआ समझौता (MoU) जनवरी 2026 में समाप्त हो चुका है। तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक इसका नवीनीकरण नहीं हुआ है। इससे एयरपोर्ट संचालन की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

रखरखाव फंड पर भी संकट
सूत्रों के अनुसार, एयरपोर्ट के रखरखाव के लिए जरूरी फंड भी अब तक BSL की ओर से जारी नहीं किया गया है। इससे AAI के सामने एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे टर्मिनल इत्यादि की देखरेख को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। AAI ने कई बार बीएसएल को मेन्टेन्स फण्ड और उससे सम्बंधित बकाया राशि, जो करोड़ में है, रिलीज़ करने के लिए पत्र लिखा है पर प्रबंधन टाल-मटोल कर रहा है। इससे तकनीकी संसाधनों के रखरखाव में संकट आ गया है। जो संभवतः भविष्य की उड़ान सेवाओं को और भी पीछे धकेल सकती है।
क्या बोकारो फिर पीछे रह जाएगा?
देवघर और अब राउरकेला की प्रगति को देखकर बोकारो के नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि एयरपोर्ट बन जाने के बाद भी यदि उड़ान सेवा शुरू नहीं हो पा रही, तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि क्षेत्रीय विकास के साथ अन्याय है। अब निगाहें सरकार, AAI और BSL पर टिकी हैं – क्या बोकारो के लिए भी राउरकेला जैसा ठोस फैसला होगा, या फिर यह एयरपोर्ट सिर्फ इंतजार की कहानी बनकर रह जाएगा?
जानिये ओडिशा सरकार ने क्या किया
राउरकेला एयरपोर्ट, जो पहले Rourkela Steel Plant (SAIL) के स्वामित्व में था, उसे बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए Airports Authority of India को सौंपने की प्रक्रिया तेज की गई। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट का विस्तार कर क्षेत्रीय औद्योगिक विकास, निवेश और यात्री कनेक्टिविटी को बढ़ाना है। राज्य सरकार ने इसमें सक्रिय भूमिका इसलिए निभाई क्योंकि मौजूदा ढांचे में सीमित उड़ानें संभव थीं और बड़े विमानों के संचालन के लिए व्यापक भूमि, वित्त और तकनीकी अपग्रेड जरूरी था।
Code 4C
कोड 4C ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मानकों की एक श्रेणी है। इसका अर्थ है कि एयरपोर्ट ऐसा रनवे, टैक्सीवे और इंफ्रास्ट्रक्चर रखे जो बड़े नैरो-बॉडी विमानों—जैसे Airbus A320 और Boeing 737—के सुरक्षित संचालन के योग्य हो। इससे ATR जैसे छोटे विमानों से आगे बढ़कर ज्यादा यात्रियों और लंबी दूरी की उड़ानों का रास्ता खुलता है।

