Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के विस्थापितों का आंदोलन शनिवार को और उग्र हो गया। नौकरी की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने बीएसएल के सभी प्रवेश द्वारों को जाम कर दिया, जिससे प्लांट में कर्मचारियों और कामगारों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई मिलों का संचालन कम करना पड़ा। मैनपावर की कमी के बीच उत्पादन पर इसका गंभीर असर पड़ा है। आंदोलन का यह विस्तार विस्थापित अप्रेंटिस संघ के बैनर तले बोकारो विधायक श्वेता सिंह के नेतृत्व में टू टैंक गार्डन में चल रहे अनिश्चितकालीन अनशन के आठवें दिन हुआ। यह धरना बीएसएल मुख्यालय के समीप जारी है।


वार्ता फिर विफल, नहीं निकला समाधान
विस्थापितों और बीएसएल प्रबंधन के बीच गतिरोध खत्म करने की शनिवार को एक और कोशिश हुई, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही। सर्किट हाउस में हुई बैठक में बीएसएल के निदेशक प्रभारी प्रियरंजन, कार्यपालक निदेशक राजश्री बनर्जी समेत वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, झारखंड राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष कुमार गौरव, बोकारो डीसी अजय नाथ झा और चास एसडीओ भी मौजूद रहे।
कुमार गौरव ने बताया कि वार्ता के दौरान प्रबंधन की ओर से मांगों पर विचार के लिए एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया गया। हालांकि विस्थापित प्रतिनिधियों ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि पूर्व में भी कई कमेटियां गठित हुईं, लेकिन उनके स्तर पर ठोस परिणाम सामने नहीं आया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार वे केवल आश्वासन या नई कमेटी के बजाय विस्थापित युवाओं के लिए नौकरी को लेकर ठोस निर्णय चाहते हैं। इसके बाद बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।

वार्ता विफल होने के बाद धरना स्थल पहुंचे नेता
बैठक विफल होने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, मंत्री और अन्य नेता आंदोलन स्थल पहुंचे और विस्थापितों के समर्थन में सांकेतिक धरने पर बैठे। इससे आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलता दिखा। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि बीएसएल प्रबंधन को विस्थापितों को रोजगार देने के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए।
आठवें दिन भी अनशन पर विधायक
बोकारो विधायक श्वेता सिंह पिछले आठ दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि जब तक विस्थापितों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में प्लांट गेट की नाकेबंदी जारी रखी जाएगी।
विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलनकारी सुनील कुमार ने कहा कि विस्थापित युवाओं को करीब डेढ़ साल से लगातार आश्वासन मिल रहा है। कई युवाओं ने अप्रेंटिसशिप पूरी कर ली है, लेकिन अब तक रोजगार नहीं मिलने से उनके परिवार आर्थिक अनिश्चितता से गुजर रहे हैं।
गेट जाम से बीएसएल के सामने बढ़ा औद्योगिक संकट
विस्थापितों की नाकेबंदी के कारण बीएसएल के सभी प्रवेश द्वारों पर कर्मचारियों और कामगारों की आवाजाही बाधित है। आंदोलन का असर अब केवल आवागमन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे प्लांट के उत्पादन, संचालन की निरंतरता और औद्योगिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर स्थिति बनती जा रही है। कई उत्पादन इकाइयों और मिलों के संचालन में कमी आने से बीएसएल के सामने मैनपावर संकट और गहरा गया है।
