Bokaro: बोकारो विधानसभा से 2019 में कांग्रेस की प्रत्याशी रही स्वेता सिंह आगामी चुनाव के पहले अपनी राजनितिक गतिविधि बढ़ा रही है। हालांकि बीतें करोनाकाल और उसके बाद के दिनों में स्वेता सिंह की उपस्तिथि लोगो के बीच कम दिखी, लेकिन अब फिर वह अपने आधार को मजबूत करने की जीतोड़ कोशिश कर रही है। इन दिनों एक अभियान के तहत स्वेता सिंह लोगो से झोली फैलाकर 1 रुपया सहयोग राशि के रूप में मांग रही है।
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स्वर्गीय समरेश सिंह की प्रतिमा के सहारे क्या सियासी जमीन होगी मजबूत ?
स्वेता सिंह पिछला विधानसभा चुनाव अपने ससुर स्वर्गीय समरेश सिंह के छत्रछाया में लड़कर करीब 99 हज़ार वोट लाकर भी हार गई थीं। अब विरासत में मिली राजनितिक पृष्ठभूमि को मजबूत करने के लिए उन्होंने स्वर्गीय समरेश सिंह की प्रतिमा स्थापित करने की पहल की है। स्वर्गीय दादा के प्रति लोगो के प्रेम को जगाकर, स्वेता सिंह अपना जुड़ाव उनसे मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्वर्गीय समरेश दादा की प्रतिमा आइटीआइ मोड़ चास में लगाने के लिए सहयोग राशि लेने का अभियान शुरू किया है।
1 रुपया लेकर, एक परिवार से जुड़ने का अभियान –
इस अभियान के तहत स्वेता सिंह स्वर्गीय दादा की विशाल प्रतिमा लगाने के लिए लोगो से एक रूपए का सहयोग ले रही है। उनका टारगेट प्रति व्यक्ति 1 रूपये लेकर स्वर्गीय समरेश सिंह की आदमकद प्रतिमा आइटीआइ मोड़ चास में लगाने की है। राजनितिक दृष्टिकोण से इस अभियान से स्वेता सिंह एक तीर से दो निशाना साधना चाह रही है। एक तो उनकी मंशा स्वर्गीय समरेश सिंह की विशालकाय प्रतिमा लगाकर जनमानस के तरफ से श्रद्धासुमन अर्पित करने की है। दूसरा इस अभियान के जरिये वह हज़ारो लोगो तक पहुँच कर उनसे अपना जुड़ाव मजबूत करना चाह रही है।
वक़्त बताएगा, स्वेता सिंह कितनी होंगी सफल-
इस अभियान में स्वेता सिंह कितनी सफल हो पाएंगी ये तो आने वाला वक़्त बताएगा। लेकिन यह अभियान लोगो के बीच उनको उनकी स्तिथि आंकने में भी मदद जरूर करेगा। जिससे वह अपनी मजबूती या कमजोरी जानकर आगे की रणनीति पर काम कर पाएं। स्वेता सिंह ने कहा कि बोकारो के हर पंचायत में जाकर सहयोग राशि लेने का कार्य किया जाएगा एवं यह कार्यक्रम सेक्टर एरिया में भी चलाया जाएगा।
स्वेता सिंह ने कहा कि 14 नवंबर को चास हरि मंदिर से स्वर्गीय समरेश दादा का प्रतिमा आइटीआइ मोड़ चास में लगाने हेतु अभियान की शुरुआत की गई। चास-बोकारो की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तदर्थ जनसहयोग के तौर पर एक रूपए प्रति व्यक्ति की सहयोग राशि लेने का निर्णय आयोजित सामूहिक बैठक में लिया गया था।
बता दें, स्वर्गीय दादा की कर्मभूमि चंदनकियारी एवं बोकारो था। यहीं से उन्होंने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी एवं जन समस्याओं के समाधान हेतु अनगिनत आंदोलन किया था। बोकारो से वे 5 बार विधायक भी बने और झारखंड सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री तक का सफर पूरा किया।
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