Bokaro : पॉक्सो एक्ट का कथित दुरुपयोग कर 22 वर्षीय युवक को नाबालिग के अपहरण के झूठे मामले में फंसाने के आरोप में अदालत ने नाबालिग के पिता को दोषी ठहराया है। बोकारो की विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश देवेश कुमार त्रिपाठी ने मामले की सुनवाई के दौरान पिता द्वारा की गई शिकायत और अदालत में दिए गए बयान को गलत पाया। अदालत ने दोषी पिता पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217 के तहत 2,000 रुपये और पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया। मामला पिंड्राजोड़ा थाने का है।

युवक पर लगाया था अपहरण का आरोप

विशेष लोक अभियोजक रविशंकर चौधरी ने बताया कि नाबालिग के पिता ने युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि वह उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। मामले में पिता ने युवक के खिलाफ अदालत में भी बयान दिया था।
कोर्ट में नाबालिग ने आरोप से किया इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान नाबालिग ने अदालत में युवक पर उसे ले जाने के आरोप से इनकार कर दिया। उसने अपने बयान में कहा कि उसके पिता युवक को झूठे आरोप में फंसा रहे हैं। नाबालिग के बयान के बाद अदालत ने शिकायत और बयान की सत्यता पर सवाल उठाते हुए पिता को झूठी शिकायत का दोषी माना।

दो धाराओं में लगाया गया जुर्माना
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217 के तहत पिता पर 2,000 रुपये और पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत का यह फैसला झूठी शिकायत के आधार पर किसी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया में फंसाने के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट ने POCSO एक्ट के दुरूपयोग पर अपनी चिंता भी जाहिर की है।
