Bokaro: बोकारो जिले में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चास मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कालापत्थर गांव में तीन घरों में चोरी की वारदात के बाद ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस सूचना मिलने के करीब चार घंटे बाद मौके पर पहुंची और प्राथमिकी दर्ज करने में लगभग 40 घंटे लगा दिए। एहि नहीं दूसरे दिन चास मुफ्फसिल के थानेदार साहब लोगो को समझाते दिखे कि आपलोग भी अपने गांव में पहरा दीजिये। रुपया और जेवर जिस रूम में सोइये उसी में रखिये। पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर ग्रामीणों की जुबान पर सिर्फ एक ही जुमला है – “चोर मस्त और पुलिस पस्त।”

एक रात, तीन घर और बेखौफ चोर
25-26 जुलाई की रात कालापत्थर गांव निवासी लालदेव गोराईं, तुलसी महतो और आशुतोष गोराई के घरों में चोरों ने धावा बोल दिया। परिवार के लोगों को सुबह करीब तीन बजे चोरी की जानकारी मिली, जिसके बाद तत्काल गांव के मुखिया और अन्य ग्रामीणों के माध्यम से पुलिस को सूचना दी गई।

थाना एक किलोमीटर दूर, फिर भी इंतजार चार घंटे का
ग्रामीणों का दावा है कि सुबह चार बजे सूचना देने के बावजूद पुलिस करीब आठ बजे घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि थाना गांव से महज एक किलोमीटर दूर है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि पुलिस को इतनी देर लगनी थी, तो फिर त्वरित कार्रवाई का दावा किसके लिए है?
तीसरी बार बना एक ही घर निशाना
पीड़ित लालदेव गोराईं ने बताया कि उनके घर से लगभग 50 ग्राम सोने के आभूषण, 300 ग्राम चांदी के गहने और अन्य कीमती सामान चोरी हो गया। उन्होंने बताया कि यह उनके घर में तीसरी चोरी है। वर्ष 2002 में पत्नी के शादी के गहने और 2009 में शादी में मिले बर्तन भी चोरी हो चुके हैं। अब ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर चोरों का हौसला बढ़ाने वाला कौन है?
पिंड्राजोरा में भी वही कहानी
ऐसा ही मामला पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के चारगोई सरदाहा गांव में सामने आया, जहां 23 जुलाई की रात कई घरों में चोरी हुई। पीड़ित संजय कुमार महतो ने बताया कि पूरा परिवार सो रहा था और चोर घर से सोने-चांदी के गहने समेत अन्य सामान लेकर फरार हो गए। हालांकि उनकी मां राजबाला देवी ने बताया कि सावन की पूजा के कारण प्राथमिकी के लिए आवेदन देने में देरी हुई।
ग्रामीणों का सवाल- ‘अगर पुलिस समय पर आती तो क्या चोर बच पाते ?’
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं और पुलिस की कथित देरी से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय होती, तो अपराधियों तक पहुंचने की संभावना अधिक रहती। अब गांवों में लोग खुद ही रातभर पहरा देने को मजबूर हैं, जबकि सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच जारी, लेकिन सुराग अब भी दूर
पुलिस अधिकारी ने कहा कि दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी है। जल्द ही चोर सलाखों के पीछे होंगे। हालांकि, अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी या चोरी गए सामान की बरामदगी की सूचना नहीं है। बढ़ती चोरी की घटनाओं के बीच ग्रामीणों की चिंता और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल फिलहाल दोनों ही बरकरार हैं.

