Bokaro: भारत के जिस जिले में दो बड़े स्टील प्लांट, चार बड़े पावर प्लांट, सीमेंट प्लांट, कोल-बेड मीथेन गैस का बड़ा भंडार, कोयले की कई खदानें और JIADA के अधीन 400 से अधिक MSME व औद्योगिक इकाइयां हों, उसी जिले में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा जिला-स्तरीय श्रम बाजार आंकड़ों में बोकारो का बेरोजगारी दर झारखंड के प्रमुख जिलों में सबसे अधिक दर्ज किया गया है।


बोकारो की बेरोजगारी दर 8.6 प्रतिशत
NSO के आंकड़ों के मुताबिक बोकारो में बेरोजगारी दर 8.6 प्रतिशत रही। यह झारखंड के 2.7 प्रतिशत के औसत से तीन गुना से अधिक है। राज्य के औद्योगिक जिलों में धनबाद की बेरोजगारी दर 8 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम की 4.3 प्रतिशत रही। आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक गतिविधियों की बड़ी मौजूदगी अपने आप में स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार में तब्दील नहीं हो रही है।
रोजगार की तलाश में भी पीछे रह रहे युवा
बोकारो का Labour Force Participation Rate (LFPR) 54.3 प्रतिशत रहा, जबकि झारखंड का औसत 59.8 प्रतिशत है। यानी काम करने या काम तलाशने वाली आबादी की हिस्सेदारी भी राज्य के औसत से कम है। इसी तरह Worker Population Ratio (WPR) 49.6 प्रतिशत रहा, जबकि राज्य का औसत 58.2 प्रतिशत है। धनबाद में WPR 46.7 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 49 प्रतिशत दर्ज किया गया।

15-29 साल के युवाओं की तस्वीर भी चिंताजनक
बोकारो में 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 30 प्रतिशत युवा NEET श्रेणी में हैं। यानी वे न रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं। झारखंड का औसत NEET दर 21 प्रतिशत है। धनबाद में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 28.3 प्रतिशत रहा।
दूसरे जिलों से अलग दिख रही तस्वीर
राज्य के दूसरे हिस्सों में तस्वीर अलग नजर आती है। पश्चिमी सिंहभूम में LFPR 68.3 प्रतिशत और WPR 67.1 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि वहां NEET दर 10.4 प्रतिशत रही। पलामू और हजारीबाग में भी रोजगार और श्रम भागीदारी के आंकड़े बोकारो, धनबाद और पूर्वी सिंहभूम की तुलना में बेहतर रहे।
उद्योग हैं, लेकिन स्थानीय रोजगार का सवाल कायम
बोकारो जिले की पहचान देश के प्रमुख औद्योगिक जिलों में होती है। यहां महारत्न कंपनी SAIL का बोकारो स्टील प्लांट (BSL) और वेदांता का ESL Steel Plant है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में DVC के चंद्रपुरा और बोकारो थर्मल पावर प्लांट, झारखंड सरकार का तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (TTPS) तथा SAIL-DVC की संयुक्त कंपनी BPSCL जैसी बड़ी इकाइयां मौजूद हैं। जिले में CCL और BCCL की कोयला खदानों के अलावा डालमिया सीमेंट का प्लांट भी संचालित है। वहीं ONGC का देश के बड़े Coal Bed Methane (CBM) गैस भंडार और उत्पादन क्षेत्र भी बोकारो में है। इसके अलावा BMW Steel, Sundaram Steel समेत कई अन्य औद्योगिक इकाइयां और JIADA क्षेत्र में 400 से अधिक MSME व उद्योग संचालित हैं। ऐसे में जिले में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के इतने बड़े आधार के बावजूद स्थानीय युवाओं के बीच बेरोजगारी की ऊंची दर का सामने आना उद्योग और स्थानीय रोजगार के बीच संबंध को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इसके बावजूद NSO के आंकड़े यह सवाल सामने रखते हैं कि बोकारो की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का लाभ स्थानीय युवाओं को रोजगार के रूप में कितना मिल रहा है ? यह आंकड़ा केवल बेरोजगारी का नहीं, बल्कि उद्योग और स्थानीय रोजगार के बीच मौजूद संभावित अंतर की ओर भी संकेत करता है।
