Bokaro: चीरा चास स्थित बसेरा कॉलोनी में महिलाओं ने सावन महोत्सव उत्साह और उमंग के साथ मनाया। कार्यक्रम में सावन की हरियाली, प्रकृति प्रेम और भगवान महादेव की भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। हरे रंग के परिधानों में सजी महिलाओं ने सावन के पारंपरिक गीत गाए और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।

प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
सावन महोत्सव के दौरान महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पेड़-पौधे लगाने, हरियाली बचाने और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया। महिलाओं ने कहा कि सावन केवल धार्मिक आस्था और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का भी अवसर है।
सावन प्रकृति के करीब आने का देता है संदेश
शिक्षिका उषा श्रीवास्तव ने कहा कि सावन हमें प्रकृति के करीब आने और हरियाली के महत्व को समझने का संदेश देता है। वहीं डोली चौधरी ने कहा कि इस तरह के आयोजन महिलाओं को एकजुट करने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।

महादेव की भक्ति के साथ प्रकृति की पूजा का भाव
अधिवक्ता संजू सिंह ने कहा कि सावन में भगवान महादेव की पूजा के साथ प्रकृति की पूजा का भाव भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में पेड़-पौधों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना बेहद जरूरी है। पुष्पा सिंह ने कहा कि सावन का उत्सव जीवन में उमंग और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
आपसी प्रेम और सहयोग को मिलता है बढ़ावा
अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि मिल-जुलकर त्योहार मनाने से महिलाओं के बीच आपसी प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि सामूहिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक माहौल बनता है और लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
हरियाली से जुड़ा है सावन का संदेश
ज्योति कुमारी ने कहा कि सावन की हरियाली मन को सुकून देती है और हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी की याद दिलाती है। खुशबू कुमारी ने कहा कि पारंपरिक पर्वों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ना चाहिए।
प्रकृति संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाने पर जोर
रागिनी सिंह ने कहा कि सावन की असली खूबसूरती हरियाली और खुशियों में है। चंदा कुमारी ने कहा कि महादेव की भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश भी समाज तक पहुंचना चाहिए। स्वीटी सिंह ने कहा कि सावन महोत्सव जैसे आयोजन महिलाओं को एक मंच पर लाते हैं और जीवन में उत्साह व सकारात्मकता का संचार करते हैं।
पारंपरिक गीतों और मनोरंजक गतिविधियों में लिया हिस्सा
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने सावन के पारंपरिक गीतों के साथ विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों में हिस्सा लिया। पूरे आयोजन में उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। अंत में सभी महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि त्योहारों को प्रकृति संरक्षण से जोड़कर मनाने से समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता को और बढ़ावा मिलेगा।


