Bokaro: ज़िले के रानीचिड़का गांव के लोगों के लिए शनिवार राहत और खुशी का दिन लेकर आया। करीब एक वर्ष से बंद पड़े सोलर जलमीनार के कारण गांव के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे थे। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ रही थी, जिन्हें पीने का पानी लाने के लिए प्रतिदिन लगभग तीन किलोमीटर दूर नदी तक जाना पड़ता था। आखिरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उठी ग्रामीणों की आवाज प्रशासन तक पहुंची और उनकी समस्या का समाधान हो गया।

ग्रामीणों की शिकायत पर उपायुक्त अजय नाथ झा ने त्वरित संज्ञान लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। डीसी के निर्देश मिलते ही विभाग हरकत में आया और चास प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राम प्रवेश राम स्वयं शनिवार को गांव पहुंचे।
खराबी दूर कर फिर शुरू किया गया जलमीनार
कार्यपालक अभियंता ने जलमीनार का निरीक्षण किया और तकनीकी खराबी की जानकारी ली। विभागीय टीम ने मौके पर ही मरम्मत कार्य शुरू किया। कुछ ही घंटों की मेहनत के बाद जलमीनार को फिर से चालू कर दिया गया। इसके साथ ही गांव में पेयजल आपूर्ति बहाल हो गई और लंबे समय से पानी की समस्या से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली।

ग्रामीणों ने जताया आभार
जलमीनार से दोबारा पानी मिलने पर ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। महिलाओं ने कहा कि पानी के लिए रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का आभार जताते हुए कहा कि प्रशासन की तत्परता ने उनकी बड़ी समस्या का समाधान कर दिया।
प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि आमजन सोशल मीडिया समेत विभिन्न माध्यमों से अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं और प्राप्त शिकायतों के त्वरित निष्पादन के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

