Bokaro: शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और समाज को दिशा देने की सबसे बड़ी शक्ति है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए चास स्थित गुरु गोबिंद सिंह एजुकेशनल सोसायटी टेक्निकल कैंपस (GGSESTC) ने अपना 16वाँ स्थापना दिवस पूरे उत्साह, गरिमा और प्रेरणादायी माहौल में मनाया। आध्यात्मिक वातावरण, शिक्षा के प्रति समर्पण और साहित्य की सुगंध से सजे इस समारोह ने विद्यार्थियों को सफलता के साथ-साथ संस्कारों का भी संदेश दिया।

उपलब्धियों की यात्रा के साथ भविष्य का विजन
समारोह का आयोजन दो चरणों में किया गया। पहले चरण का संचालन बीबीए पाँचवें सेमेस्टर की छात्रा शाहिबा अकरम ने किया। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रियदर्शी जरुहार ने स्थापना से लेकर अब तक की उपलब्धियों, शैक्षणिक उत्कृष्टता और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल तकनीकी शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो समाज और देश के विकास में सार्थक योगदान दें। इसके बाद प्रोफेसर डॉ. ए.पी. बनवाल द्वारा शबदवाणी प्रस्तुत की गई, जिसके उपरांत अरदास संपन्न हुई और पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण का संचार हुआ।
अनुशासन और समर्पण ही सफलता की असली कुंजी
संस्थान के सचिव सुरेंद्र पाल सिंह ने अपने प्रेरक संबोधन में विद्यार्थियों से अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखने और मेहनत करने वाला विद्यार्थी ही भविष्य में समाज का नेतृत्व करता है।

वहीं संस्थान के अध्यक्ष तरसेम सिंह ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को संस्थान की नई प्राथमिकता बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में शोध और नवाचार को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। इस अवसर पर संस्थान के कोषाध्यक्ष जसपाल सिंह ने भी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के पहले चरण का समापन प्रो. शहनाज़ फरहीन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
शिक्षा के साथ साहित्य का संगम बना समारोह की पहचान
समारोह के दूसरे चरण की शुरुआत निदेशक डॉ. प्रियदर्शी जरुहार के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि कविता और साहित्य समाज की संवेदनाओं को जीवंत रखते हैं तथा युवाओं के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बाद सचिव सुरेंद्र पाल सिंह ने भाषा, साहित्य और काव्य संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर अपने विचार साझा करते हुए युवाओं से अपनी मातृभाषा और साहित्यिक परंपराओं से जुड़े रहने का आग्रह किया।
“काव्य स्पंदन” में गूंजे हास्य, गीत और ग़ज़ल
स्थापना दिवस का सबसे आकर्षक आयोजन रहा भव्य काव्य सम्मेलन “काव्य स्पंदन”, जिसने पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन प्रख्यात ग़ज़लकार सुशील साहिल ने किया। सम्मेलन में बोकारो की चर्चित कवयित्री रीना यादव, धनबाद के हास्य कवि बसंत जोशी, रांची के गीतकार नितेश मिश्र तथा कोलकाता के प्रसिद्ध ग़ज़लकार सुशील साहिल ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। हास्य, गीत, ग़ज़ल और ओजपूर्ण कविताओं से सजा यह साहित्यिक आयोजन सभी के लिए यादगार बन गया।
छात्रा की स्वरचित कविता ने जीता दिल
संस्थान के सीएससी विभाग की छात्रा पलक कुमारी ने अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। उन्होंने मंच संचालन में भी अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बनाया। कार्यक्रम के अंत में एडवोकेट पल्लवी प्रसाद ने सभी आमंत्रित कवियों, अतिथियों और उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में 300 से अधिक शिक्षक, छात्र-छात्राएँ और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही।
बीएसएल के डीजीएम पवन कुमार तथा “काव्य स्पंदन” के प्रवर्तकों ने कहा कि शिक्षा, आध्यात्मिकता, साहित्य और प्रेरणा का अद्भुत संगम बना यह स्थापना दिवस समारोह संस्थान के गौरवशाली इतिहास में एक प्रेरणादायी और अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
