Bokaro: देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में कार्यरत कर्मियों की चिंता और गहरा गई है। केंद्र सरकार पर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में विफल रहने के आरोप लग रहे हैं, वहीं अब सरकारी उपक्रमों (PSU) में भी नौकरी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

ठेका कर्मियों में बढ़ी बेचैनी
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के विभिन्न प्लांटों में ठेका कर्मियों की संख्या में कटौती का सिलसिला जारी है। बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में भी इसे लेकर असमंजस और भय का माहौल देखा जा रहा है। कर्मचारियों को आशंका है कि आने वाले समय में उनकी नौकरी पर संकट गहरा सकता है।
2027 तक 40% कटौती का लक्ष्य
मिली जानकारी के अनुसार, स्टील मंत्रालय के निर्देश पर SAIL में ठेका श्रमिकों की संख्या में चरणबद्ध कमी की योजना लागू की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 20% कटौती का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें लगभग 18.8% कमी हासिल भी कर ली गई है। अब 2026-27 के लिए अतिरिक्त 20% कटौती का लक्ष्य तय किया गया है। इस प्रकार 1 अप्रैल 2025 के आधार पर कुल 40% ठेका कर्मियों की संख्या घटाने की योजना है।

BSL में आंकड़े चौंकाने वाले
आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 को बोकारो स्टील प्लांट में ठेका कर्मियों की संख्या 12,798 थी, जो 1 अप्रैल 2026 तक घटकर 10,230 हो गई। अब 1 अप्रैल 2027 तक इसे घटाकर 7,678 करने का लक्ष्य रखा गया है, यानी करीब 2,552 कर्मियों की और कटौती प्रस्तावित है।
अन्य यूनिट्स में भी असर
इसी तरह अन्य इकाइयों में भी कटौती का असर दिखेगा। उदाहरण के तौर पर बोकारो स्तिथ सेल रेफ्रेक्टरी यूनिट SRU में 1,956 कर्मियों की संख्या को घटाकर 1,173 करने का लक्ष्य रखा गया है।
कर्मचारियों ने जताई चिंता
कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि एक ओर कंपनी मुनाफे में चल रही है और उत्पादन भी बेहतर हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ठेका कर्मियों की छंटनी से सामाजिक और आर्थिक असंतुलन पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि इस फैसले से हजारों परिवार प्रभावित होंगे।
आंदोलन की चेतावनी, जनजागरण अभियान का ऐलान
इसी मुद्दे को लेकर मजदूर संगठनों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। ‘जय झारखंड मजदूर समाज’ ने 40% छंटनी के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए प्रबंधन पर “तुगलकी फरमान” लागू करने का आरोप लगाया है। संगठन के महासचिव बी के चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो प्लांट में चक्का जाम किया जाएगा। साथ ही 23 अप्रैल 2026 से विभिन्न विभागों में जनजागरण अभियान चलाने और 12 मई 2026 को प्लांट गोलचक्कर से ईडी वर्क्स कार्यालय तक विशाल प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है। मजदूर नेताओं का कहना है कि अधिकतर ठेका कर्मी मूलवासी और विस्थापित परिवारों से आते हैं, जिनके सामने रोजगार का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, ऐसे में यह फैसला उनके अस्तित्व पर सीधा खतरा है।

