Bokaro: कभी जिस घर में बेटी की बीमारी को लेकर हर दिन डर और बेबसी का साया पसरा रहता था, आज उसी घर में खुशी लौट आई है। फुसरो नगर परिषद क्षेत्र के ढोरी बस्ती, रेहवाघाट निवासी 15 वर्षीय खुशी कुमारी सफल हृदय सर्जरी के बाद सकुशल अपने घर लौट आई है। बेटी को दोबारा मुस्कुराते हुए देखकर उसके परिवार की आंखों में राहत के आंसू हैं।

खुशी नौवीं कक्षा की छात्रा है। उसके दिल में जन्मजात बीमारी के कारण करीब 6 एमएम का छेद था। डॉक्टरों ने हृदय की सर्जरी की सलाह दी थी, लेकिन गरीब परिवार के लिए यह इलाज किसी पहाड़ से कम नहीं था। खुशी के पिता अनिल कुमार मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। रोज की कमाई से घर का खर्च चलाना ही मुश्किल था, ऐसे में बेटी के महंगे इलाज की व्यवस्था करना उनके लिए लगभग नामुमकिन हो गया था।
बेटी की बीमारी ने तोड़ दिया था हिम्मत
खुशी की बीमारी का पता चलने के बाद परिवार की रातों की नींद उड़ गई थी। एक तरफ बेटी की बिगड़ती सेहत का डर था तो दूसरी तरफ इलाज के लिए पैसे नहीं थे। पिता अनिल कुमार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर वह अपनी बेटी को कैसे बचाएं। परिवार के लिए यह सिर्फ बीमारी नहीं थी, बल्कि बेटी की जिंदगी और अपने आर्थिक हालात के बीच चल रही एक ऐसी जंग थी, जिसमें उनके पास साधन बेहद सीमित थे।

सोशल मीडिया पर गुहार बनी उम्मीद की किरण
जब परिवार की परेशानी की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से सामने आई तो यह गुहार बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा तक पहुंची। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। उपायुक्त के निर्देश के बाद सिविल सर्जन, बोकारो और फुसरो नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने पहल शुरू की। प्रशासनिक सहयोग से खुशी को बेहतर इलाज के लिए अमृता अस्पताल, कोच्चि (केरल) भेजा गया।
21 अगस्त को हुआ सफल ऑपरेशन
कोच्चि के अमृता अस्पताल में 21 अगस्त 2026 को खुशी की हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उसका आवश्यक उपचार और देखभाल की गई। हालत में सुधार होने के बाद अब खुशी अपने घर वापस लौट चुकी है। बेटी को स्वस्थ देखकर परिवार की वह चिंता, जो कई दिनों से उनके दिल में पत्थर की तरह पड़ी थी, अब राहत में बदल गई है।
“मुझे नई जिंदगी मिली है…”
खुशी ने घर लौटने के बाद भावुक होकर कहा, “अब मेरी तबीयत ठीक है। मैं बहुत खुश हूं। मेरी मदद करने के लिए डीसी सर, सिविल सर्जन सर और डॉक्टरों का दिल से धन्यवाद। उन्होंने मेरी जिंदगी बचाई है।” उसकी यह बात सुनकर परिवार के चेहरे पर सुकून साफ नजर आया। जिस बेटी के इलाज के लिए कभी पैसे जुटाना सबसे बड़ी चुनौती था, वही बेटी अब स्वस्थ होकर अपने घर में है।
पिता ने जिला प्रशासन का जताया आभार
खुशी के पिता अनिल कुमार ने जिला प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि समय पर मिली मदद के कारण उनकी बेटी का इलाज संभव हो सका। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह अपनी बेटी का इलाज करा पाते। प्रशासन की पहल ने उनके परिवार की सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी।
डीसी बोले- जरूरतमंदों की मदद प्राथमिकता
उपायुक्त अजय नाथ झा ने खुशी के शीघ्र स्वस्थ होने और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया समेत विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जनशिकायतों पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता पहुंचाने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है।


