इस नए सिस्टम से न सिर्फ पैरवी और देरी खत्म होगी, बल्कि अवैध कब्जों पर भी सख्त निगरानी संभव होगी। यह तकनीकी बदलाव बीएसएल टाउनशिप प्रबंधन को एक नए स्मार्ट युग में ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।
Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के नगर प्रशासन विभाग के तहत संचालित हाउस अलॉटमेंट विभाग अब पूरी तरह प्रोफेशनल और डिजिटल सिस्टम में शिफ्ट हो रहा है। आने वाले समय में आवास आवंटन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। न पैरवी की जरूरत होगी और न ही किसी प्रकार की सिफारिश चलेगी, क्योंकि पूरा सिस्टम अब ऑटोमेटेड कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया से संचालित होगा।

डायरेक्टर इंचार्ज के निर्देश के बाद बड़ा बदलाव
बीएसएल के डायरेक्टर इंचार्ज प्रिय रंजन ने पिछले तीन महीनों में आवास आवंटन में पारदर्शिता, लीज-लाइसेंस क्वार्टरों के निष्पक्ष आवंटन और अवैध कब्जों पर रोक को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद C&IT विभाग और हाउस अलॉटमेंट विभाग ने मिलकर ‘TAMS’ नामक सॉफ्टवेयर विकसित किया है।

क्या है TAMS सिस्टम
TAMS यानी Township Asset Management System का ट्रायल रन शुरू हो चुका है। जो काफी बेहतरीन काम कर रहा है। यह सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी, तेज और टाइम-बाउंड प्रक्रिया पर आधारित है। बताया जा रहा है कि, यह हाउस अलॉटमेंट प्रक्रिया को पेपरलेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। आवास आवेदन से लेकर अलॉटमेंट और मेंटेनेंस तक की सभी सेवाएं अब ऑनलाइन होंगी। हाउस अलॉटमेंट विभाग आने की कोई जरुरत नहीं है।
मोबाइल और कंप्यूटर से पूरी प्रक्रिया
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि SAIL-BSL कर्मचारी और अधिकारी अब मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए ही आवेदन कर सकेंगे, एप्लीकेशन को ट्रैक कर सकेंगे और अलॉटमेंट से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आने वाले चंद महीनो में इसमें बिलिंग सिस्टम भी जोड़ा जाएगा, जिससे इलेक्ट्रिकल और रेवेन्यू विभाग से जुड़ी प्रक्रियाएं भी ऑनलाइन हो जाएंगी।
डेटा एंट्री और सिस्टम इंटीग्रेशन पूरा
बीएसएल के ‘सॉफ्टवेयर मैन’ कहे जाने वाले C&IT विभाग के एजीएम रंजीत कुमार और उनके बॉस जेनेरल मैनेजर जीएम शरद कुमार सिंह के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट को तैयार किया गया है। इधर हाउस अलॉटमेंट विभाग के जीएम आलोक चावला के मॉनिटरिंग में डीजीएम राजेश कुमार और डिप्टी मैनेजर अमित कुमार मजूमदार की जीतोड़ मेहनत से करीब 37,380 आवासों का डेटा सिस्टम में फीड हुआ। इसके अलावा BSL के 8,990 कर्मियों और अधिकारियों की जानकारी (स्टाफ नंबर और मोबाइल नंबर ) इसमें शामिल कर दी गई है। उनके पास सीधे OTP पहुचेंगा और वह एक्सेस कर सकेंगे।
BPSCL, SRU, RDCIS और SET से जुड़े कर्मचारियों का डेटा भी सिस्टम में जोड़ दिया गया है, जिससे उनको भी एक क्लिक पर आवेदन, पात्रता, वरिष्ठता, विकल्प और अलॉटमेंट ऑर्डर उपलब्ध हो सकेगा।
अवैध कब्जों पर सख्त निगरानी
सेक्टर 12, 6, 2 और 1 के 171 डैमेज घोषित ब्लॉकों की जानकारी भी सिस्टम में दर्ज की जा रही है। साथ ही लीज के 4,770 और लाइसेंस के 10,370 आवासों का डेटा भी अपलोड किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सिस्टम पूरी तरह लागू होने के बाद अवैध कब्जों की पहचान तुरंत हो सकेगी और फील्ड टीम को कार्रवाई के निर्देश सीधे मिलेंगे। कोई पैरवी या कोई मौखिक आश्वासन काम नहीं आएगा।
स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम से बढ़ेगी जवाबदेही
TAMS के जरिए अवैध कब्जों की स्थिति सीधे डैशबोर्ड पर दिखेगी, जिस पर सुरक्षा और फील्ड टीम को फोटो सहित रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। इसकी निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर डायरेक्टर इंचार्ज सेक्टेरियट तक की जाएगी। जिन अधिकरियों या फील्ड सुपरवाइजर को इससे जुड़ा टास्क दिया जायेगा। उनके द्वारा चिन्हित आवास का काम पूरा किया गया या नहीं ये भी सामने होगा। जिससे प्रबंधन द्वारा उसपर जिम्मेदारी तय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, चंद महीनो में सिस्टम पूरी तरह फंक्शनल होने के बाद एंटी-एन्क्रोचमेंट टीम और सर्विलांस यूनिट का भी गठन किया जाएगा, जो अवैध कब्जों पर त्वरित कार्रवाई और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करेगी।
भविष्य में अन्य प्लांटों में भी लागू होगा मॉडल
सूत्रों के अनुसार एंटी-एन्क्रोचमेंट समिति के साथ सर्विलांस टीम अवैध कब्जों पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ-साथ उनके विभागीय मुख्यालय को शिकायत भेजने और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचित करने की जिम्मेदारी देने की बात चर्चा में है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टील, सेल के जमींन और आवास के अवैध कब्ज़े को लेकर काफी गंभीर है। सेल (SAIL) में यह मॉडल पहली बार बोकारो स्टील प्लांट में लागू किया जा रहा है। सफल होने पर इसे अन्य स्टील प्लांटों में भी लागू किया जाएगा। शनिवार को हुए TAMS के डेमो में वरिष्ठ अधिकारी टीम के प्रदर्शन से काफी संतुष्ट नजर आए।

