Bokaro: खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। विधेयक को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बोकारो में रविवार को हुई बैठक में मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने विधेयक को “काला कानून” बताते हुए इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की।

‘झारखंड के हितों के खिलाफ है विधेयक’
JMM नेताओं ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी का आरोप है कि नए विधेयक से राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास योजनाओं पर दूरगामी असर पड़ सकता है।
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने केंद्र पर साधा निशाना
राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी ने गलत नीयत से गलत विधेयक पारित कराया है। झारखंड इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। देश के करीब 40 प्रतिशत खनिज झारखंड में पाए जाते हैं। यदि खनिज संसाधनों पर असर पड़ा तो राज्य का विकास रुक जाएगा और सामाजिक गतिविधियां भी प्रभावित होंगी।”

‘मंईयां सम्मान और अबुआ आवास पर पड़ेगा असर’
JMM नेता योगेंद्र महतो ने कहा, “झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने दावा किया कि खनिज संसाधनों और राजस्व पर असर पड़ने से ‘मंईयां सम्मान योजना’, ‘अबुआ आवास’, सार्वभौमिक पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं के वित्तीय संचालन पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने संशोधन विधेयक को “काला कानून” बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने “झारखंड के हाथ-पैर काटने” का प्रयास किया है।
मंटू यादव ने दी आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
बोकारो JMM महानगर अध्यक्ष मंटू यादव ने कहा कि पार्टी विधेयक के खिलाफ “आर-पार की लड़ाई” लड़ेगी। उन्होंने चेतावनी दी, “अगर केंद्र सरकार ने विधेयक वापस नहीं लिया तो JMM आर्थिक नाकेबंदी जैसे कठोर कदम पर विचार करेगा।” आंदोलन के पहले चरण में JMM ने जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। पार्टी कार्यकर्ता प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर तक लोगों के बीच पहुंचेंगे और विधेयक के कथित प्रभावों की जानकारी देंगे।
बोकारो में जुटे वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता

बोकारो में आयोजित बैठकों में पार्टी के विधायक चंदनक्यारी उमाकांत रजक, कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। नेताओं ने कार्यकर्ताओं से आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने और केंद्र सरकार पर विधेयक वापस लेने का दबाव बनाने का आह्वान किया। JMM नेता रतन लाल मांझी ने कहा कि “झारखंड की खनिज संपदा राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है” और इससे जुड़े किसी भी फैसले में राज्य के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।


