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बोकारो में भाजपाइयों ने मनाया काला दिवस, आपातकाल को लेकर ऐसे किया विरोध


Bokaro: 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार के द्वारा आपातकाल घोषित कर देश मे लोकतंत्र की हत्या की गई थी। इस घटना के विरोध में भाजपा झारखंड प्रदेश द्वारा शनिवार को राज्य के सभी जिलों में काला दिवस के रूप मे मनाया गया।

काला दिवस पर भाजपा बोकारो जिला द्वारा संगोष्ठी का आयोजन बोकारो विधायक बिरंची नारायण के आवसीय कार्यालय पर सम्पन्न हुई। जिसमे मुख्य अतिथि के रूप मे केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिकता राज्य मंत्री सह त्रिपुरा सांसद प्रतिभा भौमिक उपस्थित रही। मुख्य अतिथि द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित व दिप प्रज्वलित कर संगोष्ठी कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

संगोष्ठी कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान प्रताड़ित किये गए आंदोलनकारी पूर्व विधायक छत्रु राम महतो,डॉक्टर प्रह्लाद वर्णवाल,मधुसूदन सिंह ,त्रिलोकी सिंह को अंग वस्त्र देकर अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। मंच पर निवर्तमान सांसद रविन्द्र पांडेय, बोकारो विधायक बिरंची नारायण, पूर्व विधायक छत्रुराम महतो,पूर्व जिलाध्यक्ष प्रह्लाद वर्णवाल,मधुसूदन सिंह, रोहितलाल सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी मौजूद थी।

केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतिभा भौमिक ने कहा कि 25 जून 1975, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इस दिन को देश के सबसे दुर्भाग्यपूर्ण दिन की संज्ञा दी जाती है। 46 साल पहले आज के ही दिन देश के लोगों ने रेडियो पर एक ऐलान सुना और मुल्क में खबर फैल गई कि सारे भारत में अब आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। 46 साल के बाद भले ही देश के लोकतंत्र की एक गरिमामयी तस्वीर सारी दुनिया में प्रशस्त हो रही हो, लेकिन आज भी अतीत में 25 जून का दिन डेमॉक्रेसी के एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है।

आपातकाल के बाद प्रशासन और पुलिस के द्वारा भारी उत्पीड़न की कहानियां सामने आई थीं। प्रेस पर भी सेंसरशिप लगा दी गई थी। हर अखबार में सेंसर अधिकारी बैठा दिया गया, उसकी अनुमति के बाद ही कोई समाचार छप सकता था। सरकार विरोधी समाचार छापने पर गिरफ्तारी हो सकती थी। यह सब तब थम सका, जब 23 जनवरी, 1977 को मार्च महीने में चुनाव की घोषणा हो गई।

पूर्व सांसद रविन्द्र पांडेय ने कहा कि आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। अभिव्यक्ति का अधिकार ही नहीं, लोगों के पास जीवन का अधिकार भी नहीं रह गया था। 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया था। जयप्रकाश नारायण, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नाडीस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। जेलों में जगह नहीं बची थी।

बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि इसी दिन गुजरात में चिमनभाई पटेल के विरुद्ध विपक्षी जनता मोर्चे को भारी विजय मिली। इस दोहरी चोट से इंदिरा गांधी बौखला गईं। इन्दिरा गांधी ने अदालत के इस निर्णय को मानने से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की घोषणा की और 26 जून को आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी गई। जीवन की आवश्यकता वस्तुएँ जैसे की अनाज, खाद्य तेल आदि की कीमतें बहुत बढ़ी हुई थीं, जिनके कारण आम आदमी को बड़े संकट का सामना करना पड़ रहा था। बढ़ी हुई कीमत तथा प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध गुजरात में छात्रों ने राज्य व्यापी आंदोलन छेड़ दिया और इनकी अगुवाई सभी विपक्षी दल कर रहे थे। लोगो को जबरदस्ती नसबंदी कराई गई।

पूर्व विधायक आपातकाल के दौरान छत्रुराम महतो ने अपने ऊपर हुए प्रताड़ना के बारे मे बताया।उन्होंने कहा कि हमलोग को इस आपातकाल के विरोध करने पर जेल मे डाला गया। आज़ाद भारत में बोलने का अधिकार छीना गया। खाने पीने की किल्लत ,जबरदस्ती लोगो को जेल भेजा गया।इस 21 माह के आपातकाल मैं देश की स्थिति बद्दतर हो गई।

संगोष्ठी में महेंद्र राय, दिलीप श्रीवास्तव, संजय त्यागी सहित प्रदेश के पदाधिकारी, कार्यसमिति, जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, विभिन्न मोर्चाओ के जिला अध्यक्ष ,मंडल पदाधिकारी मौजुद थे।


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