Bokaro: बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) के विस्थापितों की रोजगार और अन्य अधिकारों से जुड़ी मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को समर्थन देने के लिए विधायक श्वेता सिंह ने श्रमिक एवं कर्मचारी संगठनों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने विभिन्न यूनियनों के अध्यक्षों और महामंत्रियों को पत्र लिखकर आंदोलनकारियों के समर्थन में नैतिक, सैद्धांतिक और संगठनात्मक सहयोग मांगा है।

विस्थापितों के त्याग का दिया हवाला
विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए स्थानीय रैयतों और विस्थापित परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीन, घर और आजीविका का त्याग किया था। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी आने वाली पीढ़ियों को सम्मानजनक रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। हालांकि, दशकों बाद भी उनकी कई न्यायोचित मांगें लंबित हैं।
उन्होंने अप्रेंटिसशिप संघ के प्रदर्शन के दौरान सीआईएसएफ के लाठीचार्ज में जान गंवाने वाले प्रेम कुमार महतो का उल्लेख करते हुए कहा कि विस्थापितों की समस्याओं और उनकी जायज मांगों का स्थायी समाधान जरूरी है। विधायक के मुताबिक, लगातार पत्राचार, वार्ता और प्रशासनिक स्तर पर प्रयासों के बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने के कारण विस्थापितों को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।

तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
विस्थापितों के आंदोलन में तीन प्रमुख मांगें उठाई जा रही हैं। पहली, पूर्ववर्ती सरकारी निर्णयों और समझौतों के अनुरूप भूमि दाताओं एवं विस्थापितों के नियोजन के लिए स्पष्ट नियमावली बनाई जाए और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में उनके अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। दूसरी, अप्रेंटिसशिप पूरी कर चुके पात्र विस्थापित युवाओं को जल्द नियोजित किया जाए। साथ ही, शेष पात्र युवाओं को अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण देकर उनके नियोजन की व्यवस्था की जाए। तीसरी, दिवंगत भूमि दाता प्रेम महतो के आश्रित को स्थायी नौकरी दी जाए।
यूनियनों से आंदोलन में शामिल होने की अपील
श्वेता सिंह ने बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन, बोकारो इस्पात कामगार यूनियन, इस्पात मजदूर मोर्चा, बोकारो स्टील राष्ट्रीय मजदूर संघ, क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ, जय झारखंड मजदूर समाज, बोकारो मजदूर समाज, सेंटर ऑफ स्टील वर्कर्स और बोकारो कर्मचारी पंचायत समेत अन्य संगठनों से आंदोलन को समर्थन देने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि विस्थापितों ने अपनी जमीन और आजीविका का त्याग किया, जबकि श्रमिकों ने अपने श्रम से संयंत्र को मजबूत बनाया। इसलिए विस्थापितों की न्यायोचित मांगों के समर्थन में श्रमिक संगठनों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
विधायक ने यूनियन प्रतिनिधियों से अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ाने और संयंत्र प्रबंधन के समक्ष उनकी मांगों को मजबूती से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी दल या व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि विस्थापितों के अधिकार, माटी की अस्मिता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी है।
