Bokaro : जिले में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उपायुक्त अजय नाथ झा ने मंगलवार को समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम के उपायों की समीक्षा की। बैठक में हाथियों की गतिविधियों की निगरानी, समय पर चेतावनी देने, जंगलों में भोजन-पानी की उपलब्धता बढ़ाने और विकास परियोजनाओं के दौरान हाथियों के कॉरिडोर को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चास क्षेत्र के तेलमोच्चो पुल के पास प्रस्तावित घाट और रिवरफ्रंट विकास योजना की भी समीक्षा की गई।

गोमिया क्षेत्र में हाथियों के कॉरिडोर की पहचान
वन विभाग की ओर से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी अधिकारियों को दी गई। वन पदाधिकारी संदीप शिंदे ने बताया कि गोमिया प्रखंड में हाथियों की आवाजाही और संघर्ष की घटनाओं से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया है। सर्वे के दौरान हाथियों के आने-जाने के रास्तों, प्रवेश और निकास स्थलों तथा पूर्व में जनहानि, लोगों के घायल होने, मकान क्षति और फसल नुकसान वाले स्थानों की पहचान की गई है।

लुगुबुरू, झुमरा पहाड़ के निचले क्षेत्र, मिर्जापुर और तेनुघाट डैम के आसपास के इलाकों को हाथियों की आवाजाही वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। लुगुबुरू से हजारीबाग की ओर जाने वाले हाथी मार्ग पर भी विशेष निगरानी रखने की बात कही गई।
कैमरे और सायरन से मिलेगी पहले सूचना
प्रशासन मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी में है। संवेदनशील इलाकों में कैमरे, थर्मल कैमरा, सूचना संदेश और सायरन के माध्यम से लोगों को समय रहते हाथियों की मौजूदगी की जानकारी देने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
गोमिया क्षेत्र में करीब छह कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों से प्राप्त सूचनाओं की निगरानी के लिए लालपनिया में नियंत्रण कक्ष बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ प्रभावित गांवों तक समय पर चेतावनी पहुंचाना है।
विकास कार्यों से प्रभावित नहीं होंगे हाथियों के रास्ते
उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सड़क, पुल, राजमार्ग, खनन या अन्य निर्माण परियोजनाओं के कारण हाथियों के पुराने आवागमन मार्ग बाधित नहीं होने चाहिए। जहां आवश्यक हो, वहां हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास या अन्य उपयुक्त मार्ग विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जाए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि हाथियों के पारंपरिक रास्तों में मलबा, निर्माण सामग्री या अन्य अवरोध जमा न किए जाएं।
जंगल में ही मिलेगा हाथियों को भोजन-पानी
मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों के भीतर हाथियों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए बांस और स्थानीय प्रजातियों के पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण करने की योजना पर चर्चा हुई। मिर्जापुर और तेनुघाट डैम के आसपास करीब 50 एकड़ क्षेत्र में बांस लगाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा जंगलों के बाहर उपलब्ध खाली जमीन की पहचान कर वहां भी पौधरोपण करने का निर्देश दिया गया, ताकि हाथियों को भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने से रोका जा सके।
सोलर फेंसिंग और मधुमक्खी पालन पर जोर
हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग लगाने का सुझाव भी बैठक में सामने आया। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए मधुमक्खी पालन को आय के वैकल्पिक साधन के रूप में बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार फूलदार पौधों और झाड़ियों का रोपण करने से मधुमक्खियों के लिए भोजन उपलब्ध होगा और ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन से अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल सकता है।
बोकारो-रामगढ़-हजारीबाग के बीच बेहतर समन्वय
उपायुक्त ने बोकारो के साथ रामगढ़ और हजारीबाग समेत आसपास के जिलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। हाथियों की गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं को जिलों के बीच तत्काल साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। इससे किसी क्षेत्र में हाथियों के पहुंचने की सूचना दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों और ग्रामीणों तक पहले ही पहुंचाई जा सकेगी। समय पर चेतावनी मिलने से ग्रामीणों को सतर्क करने और संभावित मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
तेलमोच्चो में विकसित होगा घाट और रिवरफ्रंट
बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत तेलमोच्चो पुल के पास प्रस्तावित घाट और रिवरफ्रंट परियोजना की विस्तृत योजना भी प्रस्तुत की गई। करीब 280 मीटर क्षेत्र में इस परियोजना के तहत घाट के साथ पैदल चलने का मार्ग विकसित करने का प्रस्ताव है। योजना में पार्किंग, आकर्षक प्रवेश द्वार, बैठने की व्यवस्था, बच्चों के लिए खुला स्थान, सेल्फी प्वाइंट, प्रतीक्षालय, महिला एवं पुरुष शौचालय, कपड़े बदलने के लिए स्थान और हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रावधान प्रस्तावित है।
रिवरफ्रंट को बोकारो की औद्योगिक पहचान के साथ झारखंड की संस्कृति से जोड़ने की योजना है। यहां सोहराय कला, दामोदर नदी और जिले से जुड़े प्रमुख विषयों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। परियोजना में बारिश के पानी की निकासी और पर्याप्त हरियाली का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
बैठक में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, संलग्न पदाधिकारी संदीप शिंदे, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, अपर नगर आयुक्त संजीव कुमार, जिला खनन पदाधिकारी रवि कुमार, नमामि गंगे के नोडल पदाधिकारी शक्ति कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश क

