Bokaro: थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों की समय पर पहचान और रोकथाम को लेकर शुक्रवार को सेक्टर-1 स्थित हंस रेजेंसी सभागार में प्रोजेक्ट स्वास्थ्य के तहत संवेदीकरण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का आयोजन जेएचपीईगो एवं विकास सारथी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

थैलेसीमिया और सिकल सेल की स्क्रीनिंग पर जोर
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया एवं सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों की रोकथाम, समय पर पहचान, स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और उपचार को लेकर संबंधित पदाधिकारियों एवं हितधारकों को जागरूक और संवेदनशील बनाना था।
रोकथाम और समय पर पहचान स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकता
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान भी बेहद महत्वपूर्ण है। संभावित मरीजों की प्रारंभिक अवस्था में स्क्रीनिंग कर उनकी पहचान और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने से गंभीर बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है। इससे अस्पतालों पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सकता है।

पूरे जिले में व्यापक स्क्रीनिंग की जरूरत
उपायुक्त ने कहा कि थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों की स्क्रीनिंग को पूरे बोकारो जिले में व्यापक स्तर पर संचालित करने की आवश्यकता है। इसके लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, कोल इंडिया और अन्य सहयोगी संस्थाओं को समन्वय के साथ काम करना होगा।
स्क्रीनिंग के बाद कन्फर्मेटरी टेस्ट और फॉलो-अप जरूरी
उपायुक्त ने स्क्रीनिंग के बाद चिन्हित मरीजों का कन्फर्मेटरी टेस्ट, काउंसलिंग, रेफरल और नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग से प्राप्त डेटा को स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ते हुए चिन्हित मरीजों की नियमित ट्रैकिंग की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
स्वास्थ्य चुनौतियों को लेकर समग्र कार्ययोजना बनाने का निर्देश
उपायुक्त ने सिविल सर्जन को जिले में स्वास्थ्य से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और प्राथमिकताओं को चिन्हित कर समग्र कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही, परियोजना की प्रगति और मरीजों के फॉलो-अप की नियमित समीक्षा करने को कहा।
16 स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है स्क्रीनिंग की सुविधा
सिविल सर्जन डॉ. ए.बी. प्रसाद ने कहा कि थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिले के 16 स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
मरीजों की काउंसलिंग और नियमित निगरानी पर जोर
सिविल सर्जन ने बताया कि स्क्रीनिंग के बाद मरीजों की कन्फर्मेटरी जांच, काउंसलिंग, रेफरल और नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीमारी की पहचान के साथ मरीजों की लगातार निगरानी और उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच भी जरूरी है।
सदर अस्पताल के ब्लड सेंटर से मिल रहा रक्त
उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल के ब्लड सेंटर के माध्यम से थैलेसीमिया और सिकल सेल के मरीजों को आवश्यकता के अनुसार नियमित रूप से रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रोजेक्ट स्वास्थ्य के माध्यम से स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका पर दी गई जानकारी
कार्यशाला के दौरान परियोजना के उद्देश्यों, स्क्रीनिंग प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी की पहचान, मरीजों की आगे की जांच और फॉलो-अप प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी रहे मौजूद
कार्यशाला में उप विकास आयुक्त शताब्दी मजमूदार, प्रशिक्षु आईएएस डॉ. अरविंद राधाकृष्णन, एपीआरओ अविनाश कुमार सिंह, डी. कुलभूषण सिंह (जेएचपीईगो), संजीत कुमार (कोल इंडिया प्रतिनिधि), रंजन कुमार (विकास सारथी के सचिव) और संजय सिंह (जन जागरण केंद्र के सचिव) उपस्थित रहे।
अस्पतालों के पदाधिकारियों ने भी लिया हिस्सा
इसके अलावा सदर अस्पताल और अनुमंडल अस्पताल के अधीक्षक, रेफरल अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी कार्यशाला में शामिल हुए। कार्यक्रम के माध्यम से जिले में आनुवंशिक बीमारियों की समय पर पहचान, उपचार और फॉलो-अप व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।


